छत्तीसगढ़

ओबीसी वर्ग के 8 सूत्रीय मांगों का निराकरण कर, निष्पक्ष जांच किए जाने के विषय मे ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्यों ने शिवरीनारायण तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

ओबीसी वर्ग के 8 सूत्रीय मांगों का निराकरण कर, निष्पक्ष जांच किए जाने के विषय मे ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्यों ने शिवरीनारायण तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

शिवरीनारायण:-विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की आजादी के बाद से आज देश-प्रदेश के विकास एवं आर्थिक रूप से देश की अर्थ व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी की तरह अति-महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले मतदाता, शासन द्वारा जारी आंकड़ो के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में अन्य पिछड़े वर्ग की लगभग 50 प्रतिशत आबादी निवासरत है, साथ ही वर्तमान में प्रदेश के मुखिया भी ओबीसी वर्ग से ही संबंध रखते है, समान परिस्थितियों के बावजूद भी ओबीसी वर्ग के प्रबुध्दजनों, युवाओं और छात्र-छात्राओं के हितों पर शासन प्रशासन में बैठे अधिकारियों व कर्मचारियों और उच्च न्यायालय में बैठे जातिवादी मानसिकता के न्यायाधीशो द्वारा लगातार कुठारघात किया जा रहा है। आजादी के इतिहास में आज तक ओबीसी आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में सम्मिलित न किया जाना है और तो और प्रशासन द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत विचारधीन याचिका में लंबित निर्णायक भूमिका में "ओबीसी वर्ग का जातिगत आंकड़ा वर्तमान शासन - प्रशासन द्वारा उपलबन कराया जाना" भोले भाले ओबीसी वर्ग को ठगने की कोशिश, निम्न प्रशासकीय क्षमता, लोकतंत्र में संवैधानिक व्यवस्था को लागू न करना, गैर मानवता पूर्ण कुकत्य, तानाशाही पूर्ण रवैया, संविधान में अविश्वास की धारणा को इंगित करता है जो कि विश्वपटल पर एक महान लोकतांत्रिक देश का अपमान है। शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी.) के लिए आरक्षण देश के शासन और प्रगति में प्रतिनिधित्व और भागीदारी का विषय रहा है। संविधान में आयाण की अवधारणा का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से उनकी जाति के आधार पर आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनैतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। किन्तु आजादी के बाद मानवाधिकारों के मूल रिसदांतो से वंचित कर सामाजिक और शैक्षिक सशक्तिकरण प्रणाली में घोषित आरक्षण के आधार पर समुचित हिस्सेदारी एवं प्रतिनिधित्व सुनिश्चित न कर, ओबीसी समाज के साथ अन्याय कर संवैधानिक नियमों का अवहेलना कर, ओबीसी वर्ग के आवेदकों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर के शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण, सार्वजनिक क्षेत्र के उपकमों में रोजगार से वंचित किया जा रहा है। ओबीसी महासमा (रजि.) की मुख्य मांगे निम्नानुसार है- 1 राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी की गणना कर आंकड़े प्रकाशित किया जावें। 2 असंवैधानिक कीमीलेयर की बाध्यता को समाप्त किया जावे। 3 ओबीसी की 27 प्रतिशत आरक्षण को भारत देश के सभी राज्यों में समान रूप से लागु करने हेतु भारत सरकार आध्यादेश पारित कर संविधान की नवमी अनुसूची में शामिल किये जाने का अनुरोध है। 4 संरक्षित क्षेत्रों में तेंदुपत्ता संग्रहण नहीं करने वाले अनुसूचित जनजाति को मिलने वाली कैम्या निधि की राशि वहां निवासरत समी लोगों को समान रूप से प्रदान किया जावे। 5 देश के अन्य राज्यों की भांति छत्तीसगढ़ राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित लोक कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यकम के सुव्यवस्थित संचालन हेतु पृथक से विभाग संचालित किये जाने का अनुरोध है। 6 पं. रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय रायपुर में अन्य पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों के साथ भेदभाव पूर्ण नियुक्ति वरिष्ठता, पदोन्नति (रोस्टर) में गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शीघ कार्यवाही की जावे। 7 छत्तीसगढ़ प्रदेश के शासकीय विभागों/निगमों / मंडलों/ स्वायत्तशासी निकायों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों/अधिकारियों को नियमित किये जाने का अनुरोध है एवं 15 अनियमित कर्मचारियों पर गोल बाजार रायपुर (एफ.आई.आर. संख्या-156/ वर्ष 2018) एवं आजाद चौक थाना (एफ.आई.आर. संख्या-259/ वर्ष 2018) में पंजीवघ्द केस पर न्यायालय में चल रही मुकदमें को वापस लिया जायें। 8 छ.ग. शासकीय आई.टी.आई. में रिक्त पद के विरूद कार्यरत मेहमान प्रवक्ताओं में मानदेय में वृद्धि करने एवं 62 वर्ष की आयु तक जॉब सुरक्षा देने का अनुरोध किया हैं।

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