छत्तीसगढ़

बांके बिहारी राधा रानी को आप जिस रूप में पाना चाहोगे वह उसी रूप में आपके होंगे - भागवताचार्य चुलेश्वर तिवारी

बांके बिहारी राधा रानी को आप जिस रूप में पाना चाहोगे वह उसी रूप में आपके होंगे - भागवताचार्य चुलेश्वर तिवारी

जांजगीर चाम्पा - जिले के डभरा क्षेत्र अंतर्गत साराडीह चित्रोत्पला गंगा (महानदी ) तट पर इन दिनों श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन हो रहा है जिसमें क्षेत्र भर के श्रद्धालु श्रीमद् भागवत महापुराण का भागवताचार्य चुलेश्वर तिवारी के श्री मुख से श्रवण कर रहे हैं. आज कार्यक्रम में रुक्मणी विवाह हुआ जिससे बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया. इस आयोजन में कलश यात्रा से लेकर अब तक भगवान श्री कृष्ण की समस्त लीलाओं की झांकियां निकाली गई जिसमें क्षेत्र के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। और पूरे क्षेत्र के लोग भक्ति रस में डूबे हुए है।

बांके बिहारी राधा रानी को आप जिस रूप में पाना चाहोगे वह उसी रूप में आपके होंगे - भागवताचार्य चुलेश्वर तिवारी

कार्यक्रम के दौरान कृष्ण लीला से जुड़ी अनेकों कहानियां भी भागवताचार्य के श्रीमुख से श्रद्धालुओं को सुनाई जा रही है वही भागवताचार्य चुलेश्वर तिवारी ने बांके बिहारी से जुड़ी एक कहानी श्रद्धालुओं से साझा की जिसमें भागवताचार्य ने कहा कि आप बांके बिहारी और राधा रानी को जिस रूप में मानोगे वह उसी रूप में आपसे मिलेंगे उन्होंने एक पौराणिक कथा बताते हुए कहा कि एक सेठ जो राधा रानी को अपनी बेटी के रूप में मानते थे और उसी रूप में राधा रानी की पूजा करते थे सेठ अपने तीन बहुओं के लिए मनिहारी से चूड़ी लेने को कहा तीनो बहु मनिहारी से चूड़ी खरीदें लेकिन जब सेठ मनिहारी के पास पैसे देने पहुंचा तब उस चूड़ी वाले यानी मनिहारी वाले ने सेठ को चार लोगों को चूड़ी देने की बात कही सेठ को लगा कि मनिहारी वाला झूठ बोल रहा है सेठ को लगा कि मनिहारी वाले को लालच आ गया है सेठ घर वापस आ गया रात्रि में भोजन करने के बाद वह अपनी बहुओं से पूछा तब बहुओं ने कहा कि हम लोग चार नहीं बल्कि 3 लोग ही चूड़ी लिए हैं सेठ को लगा कि मनिहारी वाला झूठ बोल रहा है इसके बाद भोजन के पश्चात सेठ सो गया। रात्रि में राधा रानी सेठ के सपने में आई और वह उदास थी पूछा की राधा रानी उदास क्यों है तब राधा रानी ने कहां की आप अपनी तीन बहुओं को अधिक प्रेम करते हो और बेटी को भूल गए आपने मुझे बेटी तो माना बेटी के रूप में पूजते भी हो लेकिन बेटी का हक नहीं दिया जब मैं चूड़ी खरीदी तो आपने मनिहारी को गलत समझा वह चूड़ी कोई और नहीं बल्कि आपकी बेटी राधा ने खरीदी है ,तब सेठ आधीरात को उठा और उस मनिहारी चूड़ी वाले के पास पहुंचा और रात्रि में अपने घर में सेठ को देख मनिहारी वाले भी हैरान रह गया सेठ ने कहा कि तुम कितने खुश नसीब हो कि तुम्हारे पास साक्षात राधा रानी आई और चूड़ी पहने मैंने तो उसको अपनी बेटी के रूप में माना लेकिन मुझे दर्शन नहीं दिए तुमको दर्शन दे तुम कितने धन्य हो और उसके बाद वह उस चूड़ी के पैसे देते हुए राधा रानी का शुक्रिया की। इस प्रसंग में भागवताचार्य ने लोगों को यह बतलाया कि बांके बिहारी और राधा रानी को आप जिस रूप में भी अपना लो वह उसी रूप में आपके हो जाते हैं।

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