छत्तीसगढ़

ग्राम पंचायत सलनी सरपंच द्वारा दलितों पर किया जा रहा अत्याचार   सरपंच ऊपर उचित कार्यवाही के लिए राजकुमार चंद्रा द्वारा दो दिनों से किया जा रहा हैं आमरण अनशन, भूख हड़ताल

ग्राम पंचायत सलनी सरपंच द्वारा दलितों पर किया जा रहा अत्याचार सरपंच ऊपर उचित कार्यवाही के लिए राजकुमार चंद्रा द्वारा दो दिनों से किया जा रहा हैं आमरण अनशन, भूख हड़ताल

जांजगीर चांपा ( जैजैपुर)/ सरपंच सलनी टंकेश्वर चंद्रा के द्वारा दलितों का मकान तोड़कर जबरदस्ती शासकीय निर्माण के नाम पर चबूतरा बनाने के खिलाफ तीन बार स्थगन आदेश के बाद भी निर्माण कार्य ना रोके जाने के खिलाफ ग्राम पंचायत सलनी थाना जैजैपपुर के निवासी राजकुमार चंद्रा ने भूख हड़ताल के दूसरे दिन भी अपना प्रण दोहराया है और कहा कि यह लड़ाई तो अब स्वाभिमान और आत्म सम्मान की है और मैं इसे अंत तक लडूंगा । मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सलनी निवासी राजकुमार चंदा की ग्राम सलनी में राइस मील है और उसके बगल में ही सरपंच सलनी के द्वारा धान खरीदी हेतु चबूतरा निर्माण किया जा रहा है । विदित हो कि इस स्थान पर तीन दलित परिवार निवास करते थे जिनके घर को तोड़कर चबूतरा का निर्माण किया जा रहा है , इसके साथ ही राजकुमार चंद्रा के द्वारा इस स्थान पर राइस मिल कीे ओर सागौन तथा मुनगा एवं अन्य पौधे लगाए गए थे जिसे सरपंच सलनी ने उखंडवा दिया और वहां निर्माण कार्य आरंभ कर दिया। विदित हो कि भूरी बाई टंडन उस स्थान पर चालीस साल से रही थी। भूरी बाई टंडन को बिना नोटिस दिए घर तोड़ने के कारण इतना मानसिक आघात पहुंचा है कि उनकी मानसिक दशा बिगड़ गई है और उनकी बोलने की शक्ति नहीं रही और उनकी हालत इतनी खराब है कि उन्हें कहे ले जाया भी नहीं जा सकता है। राजकुमार चंद्रा ने बताया कि इस स्थान पर पहले बहुत बड़ा गडढा था जिसे उन्होंने राइस मिल के चलते करीब डेढ़ लाख रुपए लगाकर मिट्टी से पटवाया है जिससे उनके राइस मिल में आने वाले वाहन आसानी से पहुंच सके। उन्होंने सरपंच सलनी से आग्रह किया कि केवल राइस मिल मे आने-जाने के लिये तीस फीट का रास्ता छोड दे पर उनके नहीं मानने पर उन्होंने तहसीलदार से निवेदन किया परंतु तहसील कार्यालय से भी कोई कार्यवाही होता ना देखकर उन्होंने 22 जनवरी से भूख हड़ताल पर बैठने का निश्चय किया और आज उन्हें भूख हड़ताल करते हुए 2 दिन हो गए परंतु अब तक तहसीलदार का आगमन नहीं हुआ है और ना ही स्वास्थ्य विभाग से उन्हें कोई देखने पहुंचा है । नियमानुसार भूख हड़ताल बैठने वाले व्यक्ति को पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा दी जाती है वहां 24 घंटे कांस्टेबल का होना आवश्यक होता है और साथ ही हर दिन उनकी जांच डॉक्टर के द्वारा होनी चाहिए परंतु अब तक पुलिस विभाग से और ना ही स्वास्थ्य विभाग से कोई नहीं पहुंचा है जिससे प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने दिखाई दे रही हैं । हड़ताल के पहले दिन अर्थात कल 22 जनवरी को तहसीलदार तहसील कार्यालय से 3 राजस्व निरीक्षक पहुंचे और उन्होंने उस स्थान का निरीक्षण और जांच किया और बताया कि यह स्थान बड़े झाड़ का जंगल में दर्ज है अर्थात यह भूमि वन विभाग के अंतर्गत आती है और वहां वन विभाग की अनुमति के बिना यहां निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता परंतु सरपंच संलनी के द्वारा यहां बिना अनुमति निर्माण कार्य कराया जा रहा है साथ ही निर्माण कार्य में मशीनों का प्रयोग नहीं होना चाहिए परंतु सरपंच संलनी के द्वारा जेसीबी का प्रयोग करते हुए महिला को नोटिस बिना दिये उनका घर तोड़ा गया । इस विषय में जनपद पंचायत सी ई ओ जैजैपुर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरपंच सलनी अपने निजी खर्च से जेसीबी का प्रयोग कर सकते हैं । यहां प्रश्न यह उठता है कि क्या शासकीय भूमि में कोई निजी पैसे का इस्तेमाल कर सकता है अगर ऐसा है तो कोई भी व्यक्ति शासकीय भूमि में अपना निजी पैसा लगाकर उसे अपनी जमीन घोषित कर सकता है । इसी तरह जब उनसे पूछा गया कि भूरी बाई टंडन का घर बिना नोटिस दिये तोडा गया है तो उन्होंने कहा कि उन्हें मौखिक कहा गया होगा क्या शासकीय कार्यो मे मौखिक बातो का कोई मतलब है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका इसके अतिरिक्त और भी घर होगा तो क्या इस बिना पर शासन किसी का घर तोड सकती है ।भूख हडताल पर बैठने वाले राजकुमार चंदा के द्वारा बताया गया है कि जब उन्होंने इस बाबत एस डी एम से बात की तो एसडीएम ने साफ कह दिया कि तहसीलदार और पटवारी जाने इस मामले में मैं नहीं जानता ।यह प्रशासन की घोर लापरवाही है कि आज 2 दिन बीत गए परंतु प्रशासन का स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग मौन दर्शक की भाती राजकुमार चंद्रा के भूख हड़ताल को देख रहा है और राजकुमार चंद्रा भूख हडताल से कमजोर हो रहे है ।

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