कृषि

वर्षा ऋतु में मत्स्य पालकों को उपयोगी सलाह

वर्षा ऋतु में मत्स्य पालकों को उपयोगी सलाह

रायपुर, 26 जून 2019 वर्षा ऋतु प्रारंभ हो रही है इसलिए मत्स्य पालकों को मछलीपालन में मत्स्य बीज संचय पूर्व एवं इसके बाद की तैयारी करना आवश्यक है।  

मछलीपालन हेतु मत्स्य बीज संचय पूर्व आवश्यक तैयारी करना जरूरी है। इसके तहत सर्वप्रथम तालाब की जुताई कर चूना डालकर तैयार करें। जिन तालाबों में पानी है एवं मत्स्य संचयन नहीं है। ऐसे तालाब में जाल चलाकर अनुपयोगी मछलियों का निष्कासन कर लेना चाहिए एवं चूना पाउडर डालना चाहिए। प्रदेश के निजी एवं शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों पर मत्स्य प्रजनन प्रारंभ हो गया है। पोखर में मत्स्य बीज संचयन की आवश्यक मात्रा की जानकारी निकटस्थ मत्स्य अधिकारी को देकर उन्नत मत्स्य बीज समय पर पोखर में संचय करें। तालाब में पर्याप्त जलस्तर होने पर एवं प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होने पर उन्नत मत्स्य बीज संचयन करें। बारहमासी तालाबों में संचयन के लिए मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों पर बोन्साई मत्स्य बीज उपलब्ध है। अतः आवश्यकता अनुसार मत्स्य बीज क्रय कर संचय कर सकते हैं। संचित मत्स्य के पोषण के लिए सरसों खली, चावल की कनकी या पैलेट फिड आवश्यक मात्रा में लेकर रख लें, जिससे समय पर आहार का उपयोग कर सके।

बंद ऋतु (16 जून 2019 से 15 अगस्त 2019 तक) में नियमानुसार नदियों एवं संबंद्ध जलाशयों से मत्स्य निष्कासन निषेध है। अतः निषिद्ध जलस्रोतों में मत्स्याखेट न करें। तालाब पट्टे पर लेकर मछलीपालन करने वाले मत्स्य कृषक निर्धारित अवधि में तालाब की पट्टा राशि जमा कर सुचारू रूप से मत्स्य पालन करें।

विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रदेश के दुर्ग, रायपुर, बस्तर, अम्बिकापुर एवं बिलासपुर संभाग में शासकीय या निजी मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों पर उन्नत मत्स्य बीज उपलब्ध है। अतः मत्स्य कृषक समय पर मत्स्य बीज संचयन करें। प्रदेश में 738 करोड़ स्पॉन उत्पादन संभावित है, जिसमें से अभी तक 110 करोड़ स्पॉन का उत्पादन हो चुका है। कार्य प्रगति पर है एवं शत्-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण करने के प्रयास जारी है।

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