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 किसानों की आय बढ़ाने में मसाला फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका: केन्द्रीय बागवानी आयुक्त : कृषि विश्वविद्यालय में एकीकृत बागवानी विकास मिशन की दो दिवसीय समीक्षा

किसानों की आय बढ़ाने में मसाला फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका: केन्द्रीय बागवानी आयुक्त : कृषि विश्वविद्यालय में एकीकृत बागवानी विकास मिशन की दो दिवसीय समीक्षा

रायपुर भारत सरकार के बागवानी आयुक्त डॉ. बी.एन.एस. मूर्ति ने आज यहां कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के मिशन के तहत बागवानी फसलों विशेषकर मसाला फसलों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत से प्रति वर्ष बड़ी मात्रा में मसाला फसलों का विदेशों में निर्यात भी किया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी मसाला फसलों के उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए यहां किसानों को हल्दी, अदरक तथा अन्य मसाला फसलांे के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को मसाला फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। डॉ. मूर्ति आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एकीकृत बागवानी विकास मिषन की 12वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का शुभारंभ कर रहे थे। इस बैठक का आयोजन भारत सरकार के संचालनालय सुपारी एवं मसाला फसलें कालीकट (केरल) द्वारा किया गया। बैठक की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ने की। बैठक में इस परियोजना के तहत देश भर में संचालित लगभग 50 केन्द्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
    बागवानी आयुक्त डॉ. मूर्ति ने कहा कि देश में अनाज और दलहन का उत्पादन आवश्यकता से अधिक हो रहा है और अब इनमें वृद्धि की संभवनाएं बहुत कम है। अब बागवानी फसलों खासकर मसाला फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी की काफी संभावनाएं है। उन्होंने कहा कि भारत में 75 प्रकार की मसाला फसलों का उत्पादन होता है। उन्होंने मसाला फसलों के अनुसंधान और विकास पर और अधिक ध्यान दिये जाने पर जोर दिया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ने कहा कि बागवानी फसलें विशेषकर मसाला फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती है। इन फसलों के उत्पादन के लिए अच्छे बीज और रोपण सामग्री उपलब्ध हो पाना एक बड़ी चुनौती है। किसानों को सही प्लांटिंग मटेरियल मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसान क्लस्टर बनाकर अगर खेती करें तो वे सही प्लांटिंग मटेरियल प्राप्त करने के साथ ही मसाला फसलों का मूल्य संवर्धन और सही तरीके से मार्केटिंग भी कर सकते हैं।
संचालनालय सुपारी एवं मसाला फसलें कालीकट (केरल) के संचालक डॉ. होमी चेरीयन ने संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि देश में लगभग 34 लाख हेक्टेयर में 80 लाख टन मसाला फसलों का उत्पादन हो रहा है। यहां से लगभग 6 बिलियन डॉलर मूल्य की मसाला फसलों का निर्यात दूसरे देशों को होता है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के तहत हल्दी, अदरक, धनिया और मेथी के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने परियोजना का सफलतापूर्वक संचालन किये जाने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की सराहना की। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के परियोजना प्रभारी डॉ. एस.एस. टूटेजा ने परियोजना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान के संचालक डॉ. के. निर्मल बाबू, छत्तीसगढ़ शासन के संचालक उद्यानिकी श्री नरेन्द्र पाण्डेय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. एल.एल. राठौर, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. ओ.पी. कश्यप सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

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