राजधानी

सबकी सहभागिता से होगा पिछड़े तबकों का विकास : डॉ. शिव डहरिया

सबकी सहभागिता से होगा पिछड़े तबकों का विकास : डॉ. शिव डहरिया

रायपुर - प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने कहा कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप छत्तीसगढ़ में सभी वर्गों को अधिकार और सम्मानमिलेगा। डॉ. डहरिया आज यहां न्यू राजेन्द्र नगर स्थित सांस्कृति भवन परिसर में आयोजित प्रदेश के सतनामी समाज के मंत्रियों और विधायकों के सम्मानसमारोह को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम समारोह का आयोजन गुरू घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा किया गया। इस अवसर पर सतनामीसमाज के नवनिर्वाचित विधायकों को समाज के लोगों ने शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान समारोह में नगरीय प्रशासन मंत्री एवं आरंगविधायक डॉ. शिव कुमार डहरिया, नवागढ़  विधायक गुरू दयाल बंजारे, पामगढ़ विधायक उत्तरी जांगडे़, भिलाईगढ़ के विधायक चन्द्रदेव राय,डोगरगढ़ विधायक  भुवनेश्वर बघेल, पूर्व विधायक   पदमा मनहर सहित समाज के साधु, संतों और मंहतों को सम्मानित किया गया।
डॉ. शिव डहरिया ने कहा कि बाबा गुरू घासीदास ने तत्कालीन समय में समाज में जो कुरीतिंया फैली थी उसे दूर करने का मार्ग बताया। राज्य सरकार उनकेदिखाएंक गए रास्तों पर चलकर छत्तीसगढ को़ विकास की अग्रणी सीढ़ी पर पहुंचने की दिशा में काम कर रही है। उन्हांेने कहा कि समाज के सभी वर्गो,समुदायों का समानता के साथ सम्मान दिलाने तत्पर है। डॉ. डहरिया ने कहा कि समाज द्वारा मंत्रियों और विधायकों का सम्मन हर्ष का विषय है लेकिन यहतभी सार्थक होगा, जब सभी लोग समाज और राज्य के विकास में सहभागी बनेंगे। उन्हांेने समाज के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास में हर संभवमदद का भरोसा दिलाया।

डॉ. डहरिया ने कहा कि समाज में पिछड़े तबके के लोगों को भी मुख्यधारा में लाने के लिए हम सबको प्रयास करने की जरूरत है। उन्हांेने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीभूपेश बघेल राज्य के लोगों की भावनाओं से भलीभांति परिचित है। छत्तीसगढ़ के लोगों के भावनाओं के अनुरूप प्रदेश के विकास के लिए राज्य सरकार दृढ़संकल्पित है।

डॉ. डहरिया ने कहा कि सामाजिक मांगों को पूरा करने के लिए संविधान में निहित व्यवस्था के अनुसार उन्हें सभी अधिकार मिले इस दिशा में काम किया जारहा है। इस अवसर पर सतनामी समाज के विभन्न संस्थाओं के प्रमुखों, सहित समाज सेवी   के.पी. खाण्डे,   सुंदर लहरे,   चंपादेवी गेंदले, उमा भटपहरी, डॉ. जे.आर. सोनी, सर्वश्री  अलख चतुर्वेदी, डी.एस. पात्रे, जी. आर. बाघमारे, सुंदर जोगी, चेतन चंदेल, रामकृष्ण जांगडे़, जगमोहन टण्डन, पप्पूबघेल, सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

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