राजधानी

प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी संस्थान शांति सरोवर रायपुर मे राजयोगी  ब्रम्हा कुमार  ओम प्रकाश भाई की छठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर मीडिया परिसंवाद आयोजन

प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी संस्थान शांति सरोवर रायपुर मे राजयोगी ब्रम्हा कुमार ओम प्रकाश भाई की छठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर मीडिया परिसंवाद आयोजन

रायपुर - प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी संस्थान शांति सरोवर रायपुर मे राजयोगी ब्रम्हा कुमार ओम प्रकाश भाई की छठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित मीडिया परिसंवाद जिसका विषय "मूल्य गत मीडिया व वर्तमान चुनौतियाँ " रखा गया उक्त कार्यक्रम पर भाटापारा के पत्रकारों सहित भारी संख्या मे अन्य क्षेत्र के भी पत्रकार शामिल हुये जहाँ पर विशेष रुप से उक्त संस्थान की ब्रम्हा कुमारी कमला दीदी क्षेत्रीय निर्देशिका इन्दौर जोन, सविता दीदी, रमेश नैय्यर वरिष्ठ पत्रकार, बल्देव शर्मा कुलपति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर ,शिव दुबे संपादक ,आर कृष्ण दास संपादक,,सिरिश मिश्रा संपादक , सरिता बहेन, आन लाईन वार्ता मे शामिल हुये हेमलता दीदी , एन. के. सिंह वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली, वही कार्यक्रम का संचालन प्रियंका कौशल ने अपने प्रखर अंदाज मे किया आज के पत्रकारिता मे मूल्यों की कमी कार्यक्रम के शुरुआत मे आनलाईन वार्ता के माध्यम से ब्रम्हा कुमारी हेमलता दीदी ने कहा की आज के पत्रकारिता मे मूल्यों की कमी होता जा रहा है जिसके कारण पत्रकारिता आज कठिन दौर से गुजर रहा है साथ ही उन्होंने यह भी कहा की यह आम जनता की आवाज है व मशाल के रुप मे सदैव धधकती रहनी चहिये इसकी रोशनी कभी कम नही होना चहिये वरना लोकतंत्र की आवाज दब जायेगा। कुलपति बलदेव शर्मा ,पत्रकारिता विश्वविद्यालय कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के कुलपति बलदेव शर्मा ने आयोजित मीडिया परिसंवाद मे कहा की यह दौर विकट है,मूल्यों की बात दूर है, इंसनियत को बचाना मुश्किल है ,पत्रकारिता इंसनियत की मशाल है, जो मूल्यों को बचाये रखता है। गरल कि तरहा कडवाहट को पीना व समाज मे खुशी बाटना पत्रकार का प्रथम ध्येय होता है, निर्भयता , सजगता, समर्पणता पत्रकारिता का मूल गुण होता है , अखबार को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड रहा है। वही संपादक शिव दुबे ने उदबोधन मे कहा की समय के साथ साथ मीडिया का भी भूमिका बदल रहा है । आज के दौर मे अखबार अक्रामक हो गया है ,साथ ही प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड रहा है, वही सोशल मीडिया के दौर मे कोई भी समाचार दबाया नही जा सकता ,प्रिन्ट अखबार का लागत बडा है इस कारण चुनौतियां भी हावी हुआ है , परंतु पत्रकारिता को लोग अपने अपने नजरिये से देखते है ,किसी भी जनहित के मुद्दे पर लोगों पर इसका विशेष प्रभाव नही दिखता , लोग एक दूसरे पर थोपकर अपने अपने जवाबदारी से बचने का प्रयास करते है ,अगर बदलाव खुद मे हो तो समाज मे बदलाव आयेगा व पत्रकारिता के मूल्यों मे भी वृध्दि हो सकता है, आर.कृष्ण दास ..संपादक पत्रकारिता के मूल्यों व चुनौतियों के कडी के बीच लीडरशिप का सशक्त नेतृत्व आवश्यक है , वही वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैय्यर ने कहा की मन शांति व मन पर नियंत्रण पत्रकारिता के मूल्यों व चुनौतियों के बीच आवश्यक है। अंत मे आभार प्रदर्शन के रुप मे कमला बहेन ने कहा की राजयोग से आत्मबल मनोबल सशक्त होता है साथ ही शुध्दि करण व दुआ देना सिखाता है,व शुभ संकल्पों का खजाना जमा होता है ,

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