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	लोक कल्याण है भारतीय पत्रकारिता का प्राण : प्रो. बलदेव भाई शर्मा

लोक कल्याण है भारतीय पत्रकारिता का प्राण : प्रो. बलदेव भाई शर्मा

रायपुर- कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्‍वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने कहा है कि लोक कल्याण और नैतिकता भारतीय पत्रकारिता का प्राण है. राष्ट्रीय जागरण एवं लोक कल्याण भारतीय पत्रकारिता का ध्येय रहा है. प्रो. शर्मा महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के अंतर्गत जनसंचार विभाग द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस पर ‘पत्रकारिता की बदलती प्रवृत्तियाँ’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन राष्‍ट्रीय वेबिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. प्रो. शर्मा ने कहा कि जनजागरण ही भाषाई पत्रकारिता का ध्येय रहा है. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में सजगता, जागरूकता, निर्भयता, लोक जागरण, सत्यान्वेषण और मानवीय संवेदना का होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की ताकत का इस्तेमाल समाज के हित में करना चाहिए. इस अवसर पर विशिष्‍ट अतिथि के रूप में विचार रखते हुए भारतीय जनसंचार संस्‍थान, दिल्‍ली के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि कोरोना काल में पत्रकारिता में काफी परिवर्तन आए हैं. यह समय पत्रकारों के लिए अनेक चुनौतियों से भरा रहा है. उन्होंने कहा कि इस बदले हुए दौर में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को डिजिटल ट्रांसफार्मेशन के लिए तैयार करना होगा. अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में जो परिवर्तन आया है वह पत्रकारिता की प्रवृत्तियों का परिवर्तन है. उन्होंने कहा कि राष्ट्र की दिशा क्या होगी, इस पर भविष्य की पत्रकारिता को देखना होगा. मुद्रित माध्यमों के सामाजिक असर की चर्चा करते हुए प्रो. शुक्ल ने कहा कि सभ्यता दृष्टि को विकसित करने में मुद्रित माध्यम बड़ी भूमिका निभा सकता है. संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए वरिष्‍ठ पत्रकार पदम पति शर्मा ने कहा कि निष्पक्षता ही पत्रकारिता की पहचान है. उन्होंने स्वातंत्र्योत्तर भारत और बाद के दिनों में पत्रकारिता आए बदलाव और बदलती गयी भूमिका की चर्चा की. दैनिक जागरण, वाराणसी के संपादकीय प्रभारी भारतीय बसंत कुमार ने कहा कि पत्रकारिता हमें चुनौतियों के बीच समाधान का रास्ता भी देती है. उन्होंने उदाहरण के साथ सकारात्मक पत्रकारिता की पढ़ाई की आवश्यकता जताते हुए नैतिक मूल्यों की बात की. जी न्‍यूज बिहार-झारखंड के संपादक स्‍वयं प्रकाश ने कहा कि बाजारवाद का युद्ध जीतना हो तो पत्रकारिता में मूल्य और सिद्धांत की पढ़ाई आवश्यक है. इसके लिए हमें गांधी और कृष्ण की विचार दृष्टि को सामने रखना चाहिए. प्रभात खबर, कोलकाता के संपादक कौशल किशोर त्रिवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता की प्रवृत्तियां बदली हैं तो पाठकों की भी प्रवृत्तियां बदली हैं. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ने रोज़गार के साधन निर्मित किए हैं. पत्रकारिता ने प्रभावित भी किया है और खुद भी प्रभावित हुई है. आरम्भ में जनसंचार विभाग के प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम का संचालन मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया. धन्‍यवाद जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अख्‍तर आलम ने ज्ञापित किया. डॉ. वागीश राज शुक्ल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया. विश्वविद्यालय के कुलगीत से कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया. संगोष्ठी में अध्यापक, शोधार्थी तथा विद्यार्थियों ने आनलाइन माध्यम से बड़ी संख्या में सहभागिता की.

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