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मंदिर को न तोड़कर भी विकास हो सकता है : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

मंदिर को न तोड़कर भी विकास हो सकता है : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती 'मंदिर बचाओ महायज्ञ आमंत्रण यात्रा" के 9 वें दिन वाराणसी जिले के गाँव - डोमरी, सूजाबाद, रामनगर, भीटी, कोदोपुर में अपने अनुयायिओं के साथ "मंदिर बंचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने पहुंचे। उत्सुक गाँव वासियों ने स्वामिश्री: से पूछा कि इस भीषण गर्मी में महाराज आप हमारे घर आये यह हमारे लिए परम् सौभाग्य की बात है। स्वामिश्री: ने कहा जब सनातन धर्म पर शासन एवं प्रशासन की कुदृष्टि पड़े तो हमे इस कुदृष्टि से होने वाले विनाश को रोकने हेतु निकलना पड़ा। स्वामिश्री: ने उपस्थित गाँव वासियों से कहा कि पुराणों में वर्णित काशी के दो विनायक मंन्दिरों के साथ साथ भारत माता मंदिर, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर व देव विग्रहों को तोड़ दिया गया है वह भी केवल विकास के नाम पर। स्वामिश्री: ने गाँव वासियों से कहा - बिना मंन्दिरों को तोड़े भी विकास हो सकता है । इस हेतु शासन एवं प्रशासन को बुद्धिमत्ता दिखाने और इंजीनियरों से सलाह कर बिना मंदिर तोड़े कैसे विकास हो सकता है इस पर कार्य करना चाहिए । सनातन धर्म के मंन्दिरों को ही क्यों तोड़ना पड़ रहा है जब कि केंद्र और राज्य में हिन्दुत्त्व वादी सरकारों का शासन है।  स्वामिश्री: ने गाँव वासियों को आमंत्रण देते हुए कहा कि हम विकास के बाधक नहीं हैं। शासन एवं प्रशासन जैसा चाहे विकास करे पर बिना हिंदुओं के मंदिर व देव विग्रहों को तोड़कर। हमे किसी भी सूरत में यह विकास मंजूर नहीं जो हमारे धर्म के प्रतीक, एकता के प्रतीक, आस्था के प्रतीक, विश्वास के प्रतीक मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को तोड़कर बनाया जाए। सनातन धर्म का पताका मंन्दिरों में ही फहरता है और यदि मंदिर तोड़ दिए जाएंगे तो पताका कहाँ फहरता हुआ दिखेगा ? क्यों एवं किसलिए हिन्दू धर्म, सनातन धर्म के लोगों के हृदय पर आघात कर उसे रक्त रंजित किया जा रहा है ? एक तो  पीएम मोदी के 4 वर्षों के कार्यकाल में राम मंदिर अयोध्या में नहीं बना पाए और ऊपर से देव नगरी काशी के प्राचीन मंदिरों को ध्वंश कर रहे हैं । स्वामिश्री: की बात सुनकर प्रत्येक गाँव वासियों ने एक सुर में कहा कि हमे मंदिर व देव विग्रहों के विनाश पर विकास कतई बर्दाश्त नहीं। सभी गाँव वासियों ने मंन्दिरों को बचाने हेतु संकल्प लिया जिसमे महिला, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे उपस्थित थे। साथ ही उन्होंने कहा कि हम बनारस के सांसद, यूपी के मुख्यमंत्री तथा हमारे विधायकों से पूछेंगे की ऐसा कौन सा विकास आप करना चाह रहे हो जिससे हमारे सनातन धर्म के मंदिर व देव विग्रहों की बलि चढ़ा रहे हो। गाँव वासियों ने यह भी कहा कि हमारी काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है, गलियों का शहर है, मंन्दिरों का शहर है, घाटों का शहर है, प्राचीन मंदिरों का शहर है , देवताओं का शहर है जिसे देखने देश एवं विदेश से श्रद्धालु आते हैं और देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शासन एवं प्रशासन को इस ध्वंश का जवाब जनता को देना होगा क्यों कि हम आम जनता ही आपको चुनकर सत्ता पर बैठाए हैं। हम विनाश के बल पर विकास किसी भी तरह से सहन नहीं करेंगे।

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