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काशी का एक कलाकार मंन्दिरों को बचाने कर रहे हैं कड़ी मेहनत ।

काशी का एक कलाकार मंन्दिरों को बचाने कर रहे हैं कड़ी मेहनत ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- उत्तरांचल क्षेत्र का प्रमुख लोक गीत "बिरहा" है जिसे संगीतबद्ध कर अपने स्वर और अंदाज से केवल उत्तरप्रदेश ही नहीं अपितु गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों में मशहूर करने का श्रेय सुप्रसिद्ध बिरहा गायक भैयालाल पाल को जाता है। सबसे खास बात है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भैयालाल पाल एवं साथियों ने मिलकर नरेंद्र मोदी और बीजेपी का अपने लोकगीत के जरिये जबरदस्त प्रचार किये थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके सहभागिता से भाजपा सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज हुई। भैयालाल पाल का गाने का अंदाज, संगीत रचना आदि सबसे जुदा थी जो जनता के मन मस्तिष्क पर बस गया था। आज पुराणों में वर्णित काशी के मंन्दिरों एवं देवमूर्तियों को तोड़े जाने से वे इतना व्यथित हो उठे की उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से आग्रह किया कि आपके मंदिर बचाओ आंदोलन से खुद को जोड़ना चाहता हूँ और मंन्दिरों को बचाने हेतु मैं अपने साथियों के साथ वाराणसी जिले के प्रत्येक गांवों में जाकर जन जागृति करूँगा। भैयालाल पाल जब कक्षा दूसरी में थे तब से वे अपने पिता स्वर्गीय मन्नी पाल के साथ कार्यक्रमों में जाया करते थे और लोक गीत बिरहा गाते थे। बचपन मे उनके परिवार को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा पर वे हार नहीं माने और इस लोक गीत को अपने जीवन के साथ जोड़कर उस मुकाम तक ले गए जहाँ से उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत महसूस नहीं हुई। भैयालाल पाल का समर्पण, साधना और अनोखा अंदाज उन्हें प्रसिद्धि के शिखर तक ले गया। भैयालाल पाल से जब पूछा गया कि आप इस आंदोलन से कैसे जुड़े तब उन्होंने कहा कि मंन्दिरों, देवताओं में हम प्रत्येक सनातन हिन्दू धर्म के लोगों का आस्था, विश्वास और भावनाएं जुड़ी हुई है। लेकिन जब नरेंद्र मोदी, महंत योगी आदित्यनाथ के सरकार में होते हुए प्रशासन द्वारा पुराणों में वर्णित काशी के सुमुख विनायक, दुर्मुख विनायक, प्रमोद विनायक, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर, भारत माता मंदिर केवल विकास के नाम पर तोड़ा गया तब मन से आवाज निकली की अब मंन्दिरों को बचाने हेतु प्रयास करना होगा और काशी के मंन्दिरों को बचाना होगा तथा काशी को देवता विहीन होने से रोकना होगा। इसी सोच ने मुझे स्वामिश्री: तक खींच लाया और मैं सेवा की भावना से बिना पारिश्रमिक के जन जागृति हेतु इस महत कार्य से खुद को जोड़ लिया।  भैयालाल पाल ने आगे कहा की मैं अपने साथियों - कवि जगदीश पाल, रामप्रसाद यादव, शालिक सेठ, विजय पाल, विनोद गौर, मुन्नालाल, प्रमोद राठौड़ के साथ इस भीषण गर्मी में वाराणसी के गाँवों में जाकर काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री: के साथ जन जागृति का कार्य कर रहा हूँ और इस कार्य से दिल को सुकून मिल रहा है। हमारे आराध्य देवों, मंन्दिरों को क्यों और किसलिए प्रशासन तोड़ रही है इसका जवाब तो उन्हें एक न एक दिन जनता को देना ही होगा। भगवान के घर मे देर जरूर है लेकिन अंधेर नहीं।

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