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भारतीय ज्योतिष व्यवस्था में वेद

भारतीय ज्योतिष व्यवस्था में वेद

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- आदि काल से ज्योतिष का विशेष महत्त्व रहा है। पहले जब राजा-महाराजाओं के घर बच्चा जन्म लेता था तब उसी क्षण ज्योतिषों द्वारा उस बच्चे का गणना कर राजा-महाराजाओं को बताया जाता है तथा ताड़ पत्र में जन्मांक चक्र बनाकर भविष्य के साथ साथ राशि, नक्षत्र, गण आदि की जानकारियों का उल्लेख रहता था। ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान है जिसे आज के समय के लोग भी गहन रुचि रखते हैं तथा दोषों के निवारण हेतु वैदिक पूजा पाठ के माध्यम से निवारण किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के बारे में विस्तृत रूप से खबरीलाल की चर्चा काशी के प्रख्यात ज्योतिष शास्त्राचार्य डॉ हरकेश तिवारी से एक मुलाकत में हुई। ज्योतिष शास्त्राचार्य डॉ हरकेश तिवारी के अनुसार - ज्योतिष सूर्यादि ग्रह नक्षत्र, ताराओं के समूह का मनुष्य आदि पर पढ़ने वाले प्रभाव के ज्ञान को ज्योतिष कहते हैं। आगे उन्होंने ज्योतिष एवं विज्ञान के मेल के बारे में बताया। डॉ हरकेश तिवारी ने बताया कि भारतीय सनातन व्यवस्था में वेद भगवान हैं, 6 अंग हैं जिसमे ज्योतिष को नेत्र कहा गया है। वेद में " ज्योतिषां पतये नमो नमः " कहा गया है। आधुनिक वैज्ञानिक युग में ज्योतिष का विशेष महत्त्व है। आर्यभट्ट, वराह मिहीर आचार्य आदियों ने ज्योतिष को वैज्ञानिक ढंग से विश्व पटल पे परिदर्शित किया है जिसमे काल यानी समय गणना मुख्य रूप से परिदर्शित हैं। समय की छोटी इकाई (कमल पत्र भेदन काल) त्रुटि से लेकर घटयदि का व्याख्या वैज्ञानिक युग के लिए आज भी सहयोगात्मक भूमिका में कार्य कर रही है। ज्योतिष शास्त्राचार्य डॉ हरकेश तिवारी ने आगे बताया कि काशी नगरी में मानघाट है जहाँ पर वेदशाला है। इस वेदशाला का जो निर्माण हुआ है वहाँ पर आज भी बिना घड़ी देखे सही समय को बताया जा सकता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि आज के वैज्ञानिक युग मे वर्षा से संबंधित समय का निर्धारण ज्योतिष विज्ञान से 90 प्रतिशत सही बताया जाता है तथा वैज्ञानिक आज भी 60 से 70 प्रतिशत पर ही अटके हुए हैं। आगे डॉ हरकेश तिवारी ने बताया कि व्यक्ति के जीवन में जो असाध्य रोग हैं उसकी जानकारी ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से ही ज्ञात किया जा सकता है तथा उसका निवारण वैदिक पूजा पाठ के माध्यम से होता है जो आज के 21 वीं सदी में भी प्रचलित है।

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