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योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

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