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मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है भरपूर जनसमर्थन।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है भरपूर जनसमर्थन।

।। "खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी की विशेष टिप्पणी ।। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि एवं ज्योतिष पीठ के मंत्री पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी में कॉरिडोर बनाने हेतु पुराणों में वर्णित प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इस कार्य का पुरजोर विरोध किया और इसी क्रम में स्वामिश्री ने काशी के धरोहरों को बचाने तथा जिस हेतु काशी विश्वविख्यात है उन सब मंदिरों को बचाने हेतु "मंदिर बचाओ आन्दोलनम" की शुरुवात की। स्वामिश्री के इस धार्मिक कार्य हेतु काशी वासियों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है लेकिन बड़े दुःख की बात है कि आज तक किसी भी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेताओं ने इस आन्दोलनम हेतु स्वामिश्री के साथ खड़े नजर नहीं आये। सभी राजनीतिक दल को समझना होगा कि धर्म नगरी काशी में देवताओं का वास होता है साथ ही साथ यह सिद्ध नगरी है जिसे देखने के लिए विदेशों से लोग आते हैं और बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के साथ साथ काल भैरव, दुर्गा मंदिर, दुर्गा कुंड, हनुमान मंदिर , कामाख्या मंदिर, सिद्ध पीठ महालाक्षी मंदिर आदि का दर्शन कर देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा मणिकर्णिका घाट में पूण्य स्नान भी करते हैं। भारत देश अपने प्राचीन सनातन धर्म और संस्कृति के लिए जाने जाते हैं जिसमे काशी समूचे विश्व में अपना अलग स्थान बनाये हुए हैं। लोगों की आस्था इस धर्म नगरी काशी से जुड़ी हुई है और इसी आस्था को विकास के नाम पर चोट पहुंचाने की कोशिश हो रही है जो ग्राह्य नहीं है। काशी क्षेत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यदि उनके संसदीय क्षेत्र में ऐसा हो तो अन्य राज्यो, जगह में फिर क्या होगा। कौन बचाएंगे भारत के प्राचीन धरोहरों को ?  उत्तरप्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी एक संत हैं तथा उन्हें भली भांति मालूम भी है कि किस तरह लोगों की आस्था काशी नगरी से जुड़ी हुई है। इस आन्दोलनम हेतु काशी वासियों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ स्वयं काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम को अपना समर्थन देंगे तथा वे पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से इस बाबत चर्चा कर बीच का रास्ता निकालेंगे तथा उत्तरप्रदेश के प्राचीन धरोहरों को बचाने हेतु अपनी पूर्ण सहभागिता भी प्रदान करेंगे। कई सामाजिक संस्था जो मंदिर बचाओ आन्दोलनम से जुड़े हैं उनका कहना है चूंकि योगी आदित्यनाथ खुद एक बड़े संत हैं और उनकी भी आस्था है तो यह आशा हम कर ही सकते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गंभीर विषय का हल स्वामिश्री से वार्ता कर  निकलेंगे ।

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