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धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः

धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः

धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः हमारे शास्त्रों में कहा गया है मौनं स्वीकृति लक्षणम् माने जो लोग अपने सामने कुछ भी होता हुआ देखें और कोई प्रतिदिन करें, चुप रहें तो उनके मौन को स्वीकृति मान लिया जाता है। वर्तमान में काशी में अनेक मन्दिरों और मूर्तियों को तोडकर प्रशासन ने मलबे में मिला दिया है और सन्त और विशिष्ट जन इस पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं इसलिए हम समझते हैं कि ऐसे धर्मद्रोहियों से अपना सम्बन्ध ही समाप्त कर लें । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज की सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने भी कहा था - तजिये ताहि कोटि वैरी सम ,यद्यपि परम सनेही । जाके प्रिय न राम वैदेही । उन्होंने आगे कहा कि हम संता के विरोधी नहीं हैं और न ही ये चाहते हैं कि कोई भी सन्त प्रशासन से अपना व्यवहार बिगाड़े परन्तु कम से कम जब हमारे सनातन प्रतीकों पर देवालयों पर हथौड़ी चल रही हो तो चुप रहना उचित नहीं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह भी आवश्यक नहीं कि सब हमारे पीछे ही चल पड़े पर जहाँ हैं वहाँ रहकर भी अपने स्तर से अपना विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। सभा में ब्रह्मचारी उद्धव स्वरूप , ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द , ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानन्द , अधिवक्ता रमेश उपाध्याय एवं आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ब्रह्मचारी मुरारी स्वरूप ने किया।

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