संपादकीय

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव उबड़ खाबड़ नहीं, पक्का रसदा तोला धरावत हंव - एचपी जोशी

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव उबड़ खाबड़ नहीं, पक्का रसदा तोला धरावत हंव - एचपी जोशी

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव।

चना के पेड़ बनाके, तोला नई चढ़ावत हंव।।

गुरतुर बोली बतरस म, तोला नई फसांवत हंव।

मानले संगी मोर बात ल, सत् धरम के रस्ता ल बतावत हव।।1।।

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव।

आगी खाए ल घलो संगी, तोला नई सिखावत हंव।।

‘‘मनखे मनखे एक समान’’ भेद ल बतवात हंव।

‘‘जम्मो जीव हे भाई बरोबर’’ गियान अइसने सिखावत हंव।।2।।

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव।

‘‘शिक्षा ग्रहण पहिलि’’ करे बर मनावत हंव।।

गंजा दारू छोडव संगी, शाकाहार बनावत हंव।

बैर भाव म कांहि नइहे, मया के बात सिखावत हंव।।3।।

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव।

एक घांव मोर संग चलव संगी, अइसे गोहरावत हंव।।

आडम्बर, अमानुषता अउ भेदभाव ल मनखे ले मिटावत हंव।

गौतम बुद्ध, गुरूनानक अउ पेरियार संग, दोसती करावत हंव।।4।।

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव।

कबीर दोहा के संग ओशो घलो के बिचार ल समझावत हंव।।

भगवान बिरसा मुण्डा जइसे लडे ल सिखावत हंव।

"भारत के संविधान सच्चा धरम" ऐहि बात बतावत हंव।।5।।

ओ दिन के सियानी गोठ तोला मैं बतावत हंव

उबड़ खाबड़ नहीं, पक्का रसदा तोला धरावत हंव

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