संपादकीय

स्याह करतूत

स्याह करतूत

अक्सर यह शक जताया जाता रहा है कि चाहे बढ़ते एनपीए का मामला हो या बड़ी रकम के संदिग्ध लेन-देन का, कुछ बैंक अफसरों की मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं होता होगा। काले धन को सफेद करने के एक ताजा वाकये ने बैंकिंग प्रणाली के भीतर भ्रष्ट तत्त्वों की मौजूदगी सिद्ध कर दी है। नोटबंदी के बाद परेशानी भरी परिस्थितियों में जहां तमाम बैंकों के तमाम कर्मचारी अतिरिक्त कार्यभार उठाने में जुटे रहे, वहीं कुछ ऐसे भी तत्त्व हैं जिन्होंने इस मुश्किल समय को अपने लिए काली-कमाई का ‘सुअवसर’बना लिया और कइयों का काला धन सफेद करने में मददगार बन गए। प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित एक्सिस बैंक के दो प्रबंधकों को सोमवार को गिरफ्तार किया। एक के घर से एक किलो सोने की सिल्ली भी बरामद हुई। आरोप है कि पकड़े गए दोनों अधिकारियों ने चालीस करोड़ रुपए मूल्य के अमान्य नोटों को फर्जी कंपनियों के खातों में जमा कराने में मदद की और उसके बदले भारी रिश्वत ली।
ये अधिकारी कुछ सर्राफा कारोबारियों और उनके दलालों के माध्यम से बैंक बंद होने के बाद रात को बैंकों में नोट जमा कराते थे। गिरफ्तार एक बैंक प्रबंधक के लखनऊ स्थित घर से एक किलो और दिल्ली के दो कारोबारियों के घरों से एक-एक किलो की सोने की सिल्लियां मिली हैं। प्रवर्तन निदेशालय की मांग पर फिलहाल अदालत ने दोनों बैंक अधिकारियों को एक हफ्ते की हिरासत में उसे सौंप दिया है। असल में यह खेल अजीब तरह से रचा गया। कुछ सर्राफा कारोबारियों ने काले धन को सफेद करने वाले भ्रष्ट अमीरों को इस बात के लिए उकसाया कि वे पचास हजार रुपए प्रति दस ग्राम सोना उनसे खरीद सकते हैं। जबकि बाजार रेट तीस हजार रुपए प्रति दस ग्राम है। इस तरह से कारोबारियों के पास करोड़ों रुपए के अमान्य नोट आ गए। इसके बाद कारोबारियों ने एक चार्टर्ड एकाउंटेंट से संपर्क किया। उसने सारी तरकीब रची। उसने पहले फर्जी ग्यारह कंपनियां मजदूरों और गरीब लोगों के नाम पर बनार्इं। फिर उनमें बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से कारोबारियों ने अपने अमान्य नोटों को जमा करना शुरू किया। इस तरह चालीस करोड़ रुपए उन्होंने इन फर्जी खातों में खपा दिए और फिर नेट बैंकिंग के जरिए ये पैसे अपने खातों में भेजने शुरू किए।
इस बीच दिल्ली पुलिस को अपने मुखबिर के जरिए इस गोरखधंधे की जानकारी हुई तो उसने प्रर्वतन निदेशालय को इसकी सूचना दी। इस पूरे काले कारोबार में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। उन लोगों को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए जिन्होंने रातोंरात महंगे दामों पर सोना खरीद कर अपनी अवैध कमाई छिपाई है। प्रवर्तन निदेशालय को चाहिए कि जिस ईमानदारी और निडरता से उसने इस मामले का पर्दाफाश किया है, उसी तरह इसे तार्किक परिणति तक पहुंचाए। समाज भी ऐसे भ्रष्ट तत्वों को बेनकाब होते देखना चाहता है। कैसी विडंबना है कि जहां आम लोग अपनी गाढ़ी कमाई से बस दो हजार रुपए निकालने के लिए बैंकों के बाहर घंटों खड़े रहते हैं, और कई बार तो उन्हें खाली हाथ वापस भेजा रहा है, वहीं कुछ लोग अपना स्याह धन सफेद करने की नई-नई तरकीबें निकालने में व्यस्त हैं। यह अपराध तो है ही, एक बड़े अभियान को पलीता लगाने जैसा भी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि ताजा वाकये के बाद वित्तीय मामलों के महकमे और भी सतर्कता बरतेंगे।

 

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