संपादकीय

लिप बहार कर घर आंगन को  तोरन द्वार सजाएंगे, दीप पर्व मनाएंगे : स्वर्ण लता राजेश त्रिवेदी

लिप बहार कर घर आंगन को तोरन द्वार सजाएंगे, दीप पर्व मनाएंगे : स्वर्ण लता राजेश त्रिवेदी

लिप बहार कर घर आंगन को

तोरन द्वार सजाएंगे,

नए वस्त्र आभूषण लेकर

दीप पर्व मनाएंगे ।

पाक कला से अपनी अब हम

रसोई में रंगत लाएंगे

मीठे खारे सारे व्यंजन

मिलकर खूब बनाएंगे ।

धूप दीप और रोली बंदन

अगर कपूर घर लाएंगे,

आमपत्र से कलश सजाकर

आसान चौक पुराएंगे ।

श्री गणेश की कर पूजा

माँ लक्ष्मी को मनाएंगे,

श्री कुबेर का ध्यान धरेंगे

विष्णु जी को रिझाएंगे ।

खुशियों की फूलझड़ी जलाकर

प्रेम के दीप जगाएंगे,

अपने और पराए संग हम

दीप महोत्सव मनाएंगे ।

स्वर्ण लता राजेश त्रिवेदी


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