संपादकीय

  सभी चाहते है सुख-दुःख,प्यार-घृणा में स्पर्श

सभी चाहते है सुख-दुःख,प्यार-घृणा में स्पर्श

सभी सुख-दुःख,प्यार-घृणा में एक दूसरे का स्पर्श चाहते और करते हैं। माँ का वात्सल्य बच्चे को सीने से स्पर्श में ही प्रकट होता है। हम जब किसी को प्रेम करते हैं तो उसे आलिंगनबद्ध करना चाहते हैं।  
जब कोई दोस्त किसी बात से परेशान होता है तो हम उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बिना कुछ कहे ही बहुत कुछ कह देते है..रात को जब बच्चा सोता है तो माँ उसके सर पर हाथ फेरती है और बच्चा सुकून से सो जाता है...आप सोच रहे होगे की मैं क्या लिखना चाह रही हूँ......मैं एक ऐसे शब्द  के बारे में लिखना चाह रही हूँ जो सोचने में बहुत छोटा लगता है पर ये शब्द बहुत बड़ा...जी हाँ मैं बात कर रही हूँ “स्पर्ष” शब्द के बारे में ...ये शब्द की सुनने में कितना साधारण सा शब्द लगता है....पर है कितना सुकून पहुचने वाला..आप को मुन्ना भाई MBBS फिल्म तो याद होगी उसमें हीरो जो भी व्यक्ति दुखी होता या परेशां होता उसे वो “हग” करता यानि की गले से लगाता और सब को यही करने को कहता..जिसे वो जादू की “झप्पी” कहता....आप ने कभी सोचा है की इस फिल्म के माध्यम से क्या दिखाना और समझाना चाह रहा था....ये स्पर्ष ही है जो इस फिल्म में दिखाया गया था...हम इसे “टचिंग पावर ” भी कह सकते है....इसमे इतनी शक्ति होती है की एक बीमार आदमी को  भी ठीक कर सकता है....एक रोते इन्सान को सुकून दे सकता है... स्पर्ष के बहुत से रूप है जैसे माता–पिता का स्पर्ष, पति-पत्नी का स्पर्ष, दोस्त का स्पर्ष, दादा-दादी का स्पर्ष, स्पर्ष चाहे जिस रूप में भी हो सच यही है की स्पर्ष हमेशा ख़ुशी ही देता है....
वर्षा.....

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