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छत्तीसगढ़ के संगीत के भीष्मपितामह कहे जाने वाले खुमान साव को दी गई अंतिम विदाई ...

छत्तीसगढ़ के संगीत के भीष्मपितामह कहे जाने वाले खुमान साव को दी गई अंतिम विदाई ...

 

सूर्यकान्त यादव @ BBN24

राजनांदगांव-- राजनांदगांव छत्तीसगढ़ के संगीत के भीष्मपितामह कहे जाने वाले खुमान साव के अंतिम संस्कार में समूचा गांव उमड़ा उनके निधन पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने जहां बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि पहुंचे वहीं पूरा गांव साव को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़ा...रविवार को उनके गृहग्राम राजनांदगांव के पास सोमनी समीपस्थ ठेकवा गांव में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया उनके निधन की खबर से साहित्यि क्षेत्र में शोक की लहर है..
छत्तीसगढ़ की समृद्धशाली लोक सांस्कृतिक परंपरा में रचे बसे गीतों और विलुप्त होती लोक धुनों को परिमार्जित कर तथा आधुनिक कवियों की छत्तीसगढ़ी रचनाओं को स्वरबद्ध कर उसे लोकप्रियता की दृष्टि से फिल्मी गीतों के समकक्ष खड़ा देने वाले खुमान साव ही थे..खुमान साव ने अपने जीवन काल का संपूर्ण समय लोक कला को हर परिस्थिति में जीवित रखने के लिए संघर्ष किया इस कारण छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को बचाने वालों की सूची में उनका नाम सम्मान से लिया जाता है...संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित स्वनाम धन्य लोक संगीतकार खुमान लाल साव सही अर्थों में छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दूत है जिन्होंने अपनी विलक्षण संगीत साधना और पांच हजार मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ महतारी का यश चहुंओर फैलाया है साव का जन्म 5 सिंतबर 1929 को डोंगरगांव के समीप खुर्सीटिकुल नामक गांव में एक संपन्न माल गुजार परिवार में हुआ।छत्तीसगढ़ी लोककला को बचाने ऐसे किया काम बचपन से संगीत के प्रति रूचि रखने वाले श्री साव ने योग्य गुरूओं के संरक्षण में संगीत की बारीकियों को समझा 14 वर्ष की कच्ची उम्र में उन्होंने नाचा के युग पुरूष मंदराजी दाऊ की रवेली नाचा पार्टी में शामिल होकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया..श्री साव स्वयं अपनी मौलिक संगीत रचना की प्रस्तुति के लिए बेचैन थे। श्री देशमुख के आग्रह को स्वीकार कर श्री साव ‘चंदैनी गोंदा’ में संगीत निर्देशक के रूप में शामिल हुए। संगीतकार श्री साव और गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया ने दिन-रात मेहनत कर ‘चंदैनी गोंदा’ के रूप में श्री देशमुख के सपने को साकार किया आज उनके अंतिम संस्कार में राजनांदगांव जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है।

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