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शासकीय नर्स ने घर में कि  नसबंदी, तबीयत बिगड़ी तो रायपुर रेफर किया, इलाज के दौरान मौत....

शासकीय नर्स ने घर में कि नसबंदी, तबीयत बिगड़ी तो रायपुर रेफर किया, इलाज के दौरान मौत....

 

खैंदा में पदस्थ है नर्स, निजी डॉ. की मदद से घर पर ही करती है डिलीवरी , ओपरेशन 

 

प्रशासन जिस दौर में फर्जी डॉक्टरों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं उसी दौर में रजिस्टर्ड प्रेक्टिशनर भी अपने स्टाफ के भरोसे निजी तौर पर इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खेल रहे हैं। इसी तरह का एक मामला प्रकाश में आया है, जिसमें कम उम्र में मां बनने से बचने की हसरत लिए नसबंदी कराने एक नर्स से मदद लेने गई महिला उसके जाल में फंसकर जान गंवा बैठी। दरअसल वह नशबंदी कराने एक नर्स के पास गई थी, जो निजी प्रेक्टिशनर की मदद से अपने घर पर ही यह काम करती है। कुल 10 हजार रुपए खर्च करने के बाद 3 दिन तक जीवन और मौत से जूझती महिला ने 24 मई को दम तोड़ दिया। पीड़िता के परिजनों के अनुसार बिना एसी और ओटी के हुए इस ऑपरेशन में महिला को जीते जी मार डाला।  

पूरा मामला, पलारी ब्लाक के ग्राम गुमा निवासी गुमान पाल की बेटी पूर्णिमा पति राजू पाल 26 साल जो ग्राम पुर्नबोड बेमेतरा में शादी हो कर गई थी जिसके 4 छोटे-छोटे बच्चे हैं। एक साढ़े तीन साल, एक ढाई साल के अलावा 3 माह पहले उसे दो जुड़वा बच्चे भी हुए हैं। 8 मई को पूर्णिमा के माता पिता का सड़क हादसे में चोट लगने पर उन्हें देखने दुधमुंहे दो जुड़वा बच्चों के साथ मायके गुमा गई तो मां ने उसे समझाया इतनी जल्दी-जल्दी गर्भ धारण करने से सेहत गिरती है अत: नसबंदी करवा ले। समझाइश पर वह अपनी मां शिवबती व भाभी लक्ष्मी के साथ 20 मई को 10 बजे शासकीय अस्पताल खैंदा की नर्स डागेश्वरी यदु से, जो निजी डॉक्टर की मदद से इस तरह के काम करती है, से सलाह लेने 15 किमी दूर बलौदाबाजार गई। नर्स ने कहा कि ये काम वह खुद कर देगी, जिसके 7 हजार रुपए लगेंगे। दो घंटे बाद 12 बजे 45 डिग्री तापमान में बिना वातानुकूल ओटी के उसने पूर्णिमा की नसबंदी निजी प्रेक्टिशनर डॉ. प्रमोद तिवारी की मदद से अपने घर पर ही करा दी और शाम 5 बजे छुट्टी भी दे दी। 

 22 तारीख को अचानक पूर्णिमा की तबीयत खराब हो गई ....

डागेश्वरी के घर पहुंचे। नर्स ने डॉ. तिवारी से फोन पर सलाह लेकर एक दिन घर पर ही इलाज किया और 23 तारीख को डेढ़ बजे डिस्चार्ज कर दिया। इस बार दोनों ने पीड़िता से 3 हजार रुपए फिर लिे। उसी दिन रात को पूर्णिमा की फिर तबीयत खराब हुई तो रात 10 बजे घर वाले पिर नर्स के घर पहुंचे, जहां डॉ. प्रमोद तिवारी मौजूद थे। उन्होंने पीड़िता का चेकअप करने के बाद  रात 12 बजे अपने बेटे डॉ. नितिन तिवारी के बलौदाबाजार स्थित चंदादेवी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां स्थिति गंभीर होते देख रात दो बजे आरोग्य अस्पताल रायपुर रेफर कर दिया। पीड़िता 4.45 बजे आरोग्य पहुंची पर इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पीड़िता के परिजनों ने इसकी रिपोर्ट सिविल लाइंस थाने रायपुर में दर्ज कराई है, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

परिवार ने लगाया आरोप..

पूर्णिमा की भाभी लक्ष्मी, मां शिवबती और पति गुमा के हेमकुमार धुव्र राजू ने कहा कि पैसे के लालच में बिना सुविधा के लापरवाहीपूर्वक नसबंदी कर नर्स डिगेश्वरी यदु व डॉ. प्रमोद तिवारी ने मासूम बच्चों के सिर से मां का साया छीन लिया। दोनों ने मिलकर हमें धोखा दिया। 

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