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युवा दीपक तिवारी ने मुलमुला-नरियरा क्षेत्र के लोगां को पंक्षी और पर्यावरण संरक्षण पर जागरूक किया

युवा दीपक तिवारी ने मुलमुला-नरियरा क्षेत्र के लोगां को पंक्षी और पर्यावरण संरक्षण पर जागरूक किया

जांजगीर चाँपा:- प्रदेशस्तर पर चल रहे इस अभियान में दीपक ने जांजगीर जिले सहित दुसरें जिलों में भी जाकर अबतक 4,000 चार हजार से ज्यादा लकड़ी के कलरफुल घोसला का निःशुल्क वितरण कर लिया है। साथ ही पंक्षीयों को भुख प्यास से बचाने दाना -पानी देने के लिए हजारों की संख्या में मिटट्ी के बर्तन व ब्राउन पेपर से बने दाने के पैकेट का निःशुल्क वितरण युवा दीपक तिवारी स्वयं के खर्च पर कर चुके है । और निरंतर वह इन सामाग्रीयों का निःशुल्क वितरण कर रहे है। युवा दीपक तिवारी पंक्षी संरंक्षण व संवंर्धन पर कार्य कर लोगों को जागरूक कर प्रेरित कर रहें है । इसी कड़ी में उन्होंने नरियरा , मुलमुला क्षेत्र में जगह-जगह चौक चौराहों व गलियों में लोगों को प्रेरित करने लकड़ी के कलरफुल घोसला , मिटट्ी के सकोरे ,ब्राउन पेपेर से बने आनाज वाले दानां के पैकेट व पाम्पलेट का निःशुल्क वितरण किया । साथ ही ग्रामीणों से संकल्प -पत्र भरवाकर पंक्षी और पर्यावरण संवंर्धन का संकल्प दिलाया। जांजगीर-चांपा जिले से विलुप्त हो रहे पंक्षीयों के संरंक्षण व संवंर्धन का बीड़ा उठाने वाले व स्वयं के खर्च पर पंक्षी संरंक्षण पर निरंतर अपनी सेवा दे रहे ग्राम तिलई के युवा दीपक तिवारी ने लोंगो को जागरूक करने मुलमुला नरियरा क्षेत्र में जगह -जगह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। विगत दिनों मुलमुला और नरियरा क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक स्थानों में दीपक ने अपने हाथों से तैयार किए लकड़ी के कलरफुल घोसले, मिटट्ी के सकोरे,पाम्पलेट,अनाज के दानों वाला ब्राउन पेपर के पैकेट व संकल्प पत्र का निःशुल्क वितरण किया और लोंगों को बेजुबान पंक्षीयों के लिए घर में लकड़ी के कलरफुल घोसले में सुरक्षित आसरा देने ,भुख-प्यास से बचाने मिटट्ी के सकोरे में दाना पानी रखकर उनके लिए दाना - पानी की व्यवस्था करने तथा अभियान में अपनी महत्पूर्ण सहभागिता निभाने हाथ जोड़कर आग्रह किया । दीपक ने नरियरा के पेट्रोल पंप के पास भी राह चल रहे लोंगो को घोसला,मिटट्ी के सकोरे, पाम्पलेट,व अनाज के दानों का वितरण किया और अपने साथ-साथ दुसरें लोगों को भी पंक्षी संरंक्षण पर जागरूक कर प्रेरित करने को कहा। नरियरा ,मुलुमुला क्षेत्र में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रमों को युवा दीपक तिवारी ने किया संबोधित।

युवा दीपक ने कहा की आप लोगों से मुझे कोई पैसा या वस्तु नहीं चाहिए आप केवल इस अभियान के लिए लोंगों को जागरूक कर प्रेरित करने में मेरा साथ दें। आज हम सभी अपनी आवश्कताओं को पूर्ण करने पुरी तरह से सक्षम है और जो चाहिए वह हासिल कर रहे है , अपने खुशी से कोई समझौता नहीं करते हमारी जिन्दगी हमें स्वतंत्र जीना अच्छा लगता है। क्योंकि हम हमारी जीवन में आने वाली समस्त समस्याओं को स्वयं हल कर लेतें है । लेकिन क्या सिर्फ अपने सुख के लिए ही जिना सही है? नही अगर हम एैसा जीवन जितें है तो यह एक स्वार्थ पूर्ण जीवन होगा ईश्वर ने सिर्फ इंसान को ही इस काबिल बनाया है। की वह अपने साथ-साथ दुसरे प्राणियों की सहायता कर सकता है, तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि ईश्वर के दिए इस वरदान को व्यर्थ न जाने दें।अपने इस समय और अवसर सदुपयोग करें । जीवन उसी का सार्थक जों दुसरों के काम आय। मृत्यु सत्य है जाना सभी को है एक दिन इस दुनिया से , तो क्यो ना कोई अच्छा कर्म करके जाए ,बेजुबान पंक्षीयों के प्रजाति को सुरक्षित बनाकर उन्हेंं एक नया जीवन देंतें जाए। तो हमारा जीवन निश्चित ही सार्थक बन जाएगा।

निस्वार्थ भाव से हजारों लोगों को अभियान से जोड़ा लेकिन अभियान के नाम पर किसी से कोई पैसा नही लिया है। शुरू से अभीतक स्वयं के खर्च से सभी सामान बांट रहें हैं दीपक तिवारी।

दीपक ने जिस अभियान की नीवं अपने ग्राम तिलई से रखी थी वह आज प्रदेशस्तर पर पहुंच गया है। और प्रदेशस्तर पर इसका प्रचार प्रसार हो रहा है। साथ ही हजारों लोंग भी उनके अभियान से जुड़ गए है , लेकिन दीपक आज भी अभियान के नाम पर किसी से कोई पैसा नहीं लेतें । दीपक तिवारी जांजगीर के ज्ञानज्योति उ0मा0 विद्यालय जांजगीर में शिक्षक है सारा खर्च वें अपने सैलरी का पैसा दैनिक खर्च से बचाकर करते है। उनका कहना है कि यह परोपकार का कार्य है और किसी परोपकार के कार्य को करने में किसी से पैसे नहीं लेना चाहिए। अगर हम कार्य को करने के बदले पैसे लेते है तो वह कोई परोपकार नही हुआ। मैने शुरूआत से अभी तक किसी से पैसा नही लिया और आगे भी नहीं लुगां , आगे भी यह अभियान मेरे स्वयं के खर्च पर एैसे ही चलता रहेगा। और पंक्षी संरंक्षण अभियान को बेहतर से बेहतर दिशा देने की हर संभव प्रयास इसी प्रकार करता रहुंगा। जिससे विलुप्त हो रहे पंक्षीयों के प्रजाति को बचाया जा सके। युवा दीपक बेजुबान पंक्षीयों व पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि हमारे समाज के लिए भी एक अनुकरणी कार्य कर रहे है। उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व ही जांजगीर नेत्र विभाग में जाकर अपनी दोनों आखें दान करने की घोसणा कर मृत्युउपरांत किसी के अंधेरे जीवन को रौशन करने का नेक कार्य कर चुके है। दीपक समाज में पंक्षी और पर्यावरण के साथ-साथ लोगों को नेत्रदान के प्रति भी जागरूक कर प्रेरित करतें है।

पंक्षी संरंक्षण से किसानें को भी होगा लाभ खेती में आर्थिक बचत उत्पादन अधिक

अपने प्रचार -प्रसार के दौरान किसानां को दीपक ने खेति संबंधित जानकारी देते हुए कहां की पंक्षीयों को किसान मित्र कहा गया है। आप सभी अपने घर में आंगन के साथ-साथ अपने खेतों पर भी यह लकड़ी का घोसला रखें जिससे पंक्षी आपके खेतों में उपस्थित हानिकारक किड़ों मकोडों को नस्ट कर सके । पंक्षीयों को संरक्षण प्रदान करने से वे जैविक किटों के नियंत्रण का कार्य करती है। जिससे किसानों को आर्थिक बचत होती है।परागकण में भी सहायक होते है। किटनाशक के प्रयोग से खेतों के मिटट्ी को भी बहुत नुकसान होता है।जिससे खेतों में कई तरह की बिमारियों का आना व उत्पादन क्षमता कम होने वाली समस्या से जुझना पड़ता हैं। अगर हम पंक्षीयों का संरक्षण करें उन्हें सुरक्षित रखें तो ये बेजुबान पंक्षी हमारी खेती की आर्थिक खर्च बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को संतुलित बनाय रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर हमारी सहायता करती है। इसलिए हमें भी उनके संरक्षण व संवर्धन कर आज अति आवश्यक हैं।H

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