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छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार  2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजित

छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजित

रायपुर छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजितआयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों एवं विविध खानपान का प्रचार प्रसार कर राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना है। आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ी थाली (३ अलग अलग रूप में) को संयोजित एवं परिभाषित किया जायेगा। तीन अलग अलग थालियों का नामकरण निम्न तरह से किया जायेगा: *1.आहारी थाली:* आहारी थाली छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबु लिए हुए है, जिसमें भात (चावल) दाल, सब्जी, भाजी, अचार, चावल का पापड़, एवं सिलबट्टे की चटनी सम्मिलित होती है। यह सामान्य रूप से सभी घरों में खायी जाती है। *2. व्यवहारी थाली:* यह छत्तीसगढ़ के संस्कार एवं परंपरा को प्रदर्शित करती है। यह किसी भी विशेष मेहमान के लिए जैसे दामाद, समधी, सम्मानित रिश्तेदारों आदि के लिए बनायीं जाती है। आमतौर पर इसमें चौसेला (चावल आटे की पूरी या पूड़ी), सोंहारी (पूरी या पूड़ी का छत्तीसगढ़िया स्वरुप) भात (चावल), जिमीकंद की सब्जी, बैगन अथवा भिंडी आदि की तली हुयी सब्जी, भजिया कढ़ी, अथान (साबुत आम का भरवां अचार), बिजौरी, लाई बड़ी, दही मिर्च आदि का समावेश होता है। *3. त्यौहारी थाली:* छत्तीसगढ़ की माटी के विविध संस्कृति, वेशभूषा एवं परम्पराओं की भांति यहाँ के परंपरागत भोजन भी रंग बिरंगे तथा विविध स्वाद एवं खुशबु लिए होते हैं। त्यौहारी थाली हमारे रंग बिरंगे त्योहारों का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक छत्तीसगढिया के लिए गर्व का विषय है कि हमारी संस्कृति में हर तीज त्यौहार के लिए एक अलग व्यंजन, अलग तरह का खान पान अपनाया जाता है। उदाहरण के लिए होली पर यहाँ अनरसा या अइरसा (चावल आटे और गुड़ या शक्कर के साथ बनने वाली मिठाई), दीपावली में गुझिया, पपची, पुराण लड्डू, हरेली में गुड़ का चीला, तीजा पोरा में खुरमी और ठेठरी, गोवर्धन पूजा में कद्दू और कोचई की सब्जी अन्य खाद्यान्नों के साथ अनिवार्य रूप से बनती है। यहाँ तक कि पूर्वजों को श्राद्ध के समय पूड़ी एवं उड़द दाल के बड़े के साथ मालपुए का होम हवन में प्रयोग किया जाता है। आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ी खाने में निम्नलिखित व्यंजन, खानपान शामिल हैं। इसके अनुसार ही स्टाल वितरित किया जाएगा। 1. अंगाकर रोटी, घी, गुड़ और चटनी 2. चीला, चटनी 3. फरा तथा दूध फरा 4. आहारी थाली 1 : दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी, चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान और गुड़ की खीर। 5. खमरछठ थाली: पसहर चावल, दही, घी, भाजी साग 6. आहारी थाली 2 : दाल, भात, इड़हर की सब्जी, चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान और मालपुआ। 7. छोटी थाली : चौसेला, टमाटर चटनी (सब्जी), अनरसा 8. व्यवहारी थाली : सोंहारी (पूरी) दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी या इड़हर, हरी/लाल चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान, बिजौरी, लाई बड़ी, और गुड़ की खीर। 9. त्योहारी थाली : सोंहारी (पूरी) दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी/ इड़हर, डुपकी कढ़ी, हरी/लाल चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान, बिजौरी, लाई बड़ी, और गुड़ की खीर। खाजा/लड्डू/पप्ची (त्योहारी थाली में तिहार के हिसाब से संयोजन रहेगा जैसे होली, दिवाली, गोवर्धन पूजा, दशहरा आदि) इसके अतिरिक्त भाजी, दही बड़ा, देहरोरी, मूंग/ उड़द बड़ा, बांटी रोटी, गुझिया, पूरन लड्डू, पीड़िया, चूरमा लड्डू, आयुर्वेदिक (छेवारी लड्डू) ठेठरी, खुरमी, सेवई (हाथ से बना), अथान, सुष्की या खोइला आदि के स्टाल का वितरण किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 आयोजन की खास विशेषताएं 1. सभी स्टाल की बिक्री सुनिश्चित करने कूपन का आयोजन के पूर्व विक्रय किया जाएगा । 2. कूपन धारकों को निश्चित उपहार एवं गिफ्ट तथा फूड वाउचर दिया जाएगा ताकि आयोजन के 15 दिनों के अंदर विभिन्न स्वाद का आनंद ले सकें। आयोजन स्थल के बाहर शहर के विभिन्न स्थलों पर स्थित खाद्य उत्पादों/ फ़ूड स्टाल्स द्वारा यह गिफ्ट वाउचर प्रायोजित किया जायेगा। 3. आयोजन स्थल में प्रतिदिन संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा। 4. आयोजन के पश्चात खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार हेतु स्वतंत्र/ महिला स्व सहायता समूह को प्रशिक्षण प्रदान कर, व्यवसाय प्रारंभ करने सफलतापूर्वक संचालित करने हेतु मार्गदर्शन दिया जाएगा।

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