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शिवरीनारायण में लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी...पढ़े ये विशेष रिपोर्ट

शिवरीनारायण में लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी...पढ़े ये विशेष रिपोर्ट

NEWS Edited By :YASH LATA

प्रियांश केशरवानी ( विशेष  खबर )

जांजगीर चाम्पा  जिले का शिवरीनारायण नगर लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रही हैं। इसके बाद भी आजतक इस ओर किसी का ध्यान नही गया। यहां के जनप्रतिनिधि महज वोट मांगने तक ही जनता से वास्ता रखते हैं वहीं अधिकारी मंदिर दर्शन के अतिरिक्त यहाँ आकर और कोई काम नही करते है एसा कहना है यहाँ के नगरवासियों का | 

गौरतलब है कि शिवरीनारायण आसपास के 50 गांवों का केंद्र बिंदु हैं।यहाँ रोजाना बड़ी संख्या में आसपास के लोग अपने व परिजनों के इलाज के लिए पहुँचते हैं।लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम एक सिविल डिस्पेंसरी संचालित है।जिसमे एक सरकारी डॉक्टर अपने कुछ कर्मचारियों के साथ लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रही हैं।अक्सर देखा जाता हैं कि यदि दुर्घटना में घायल कोई मरीज इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुँचता हैं तो उसे अन्यत्र रिफर करने के आलावा कोई रास्ता नही होता।समय पर इलाज नही मिलने से बहुतों की जान भी चली जाती हैं।क्योंकि शिवरीनारायण में कोई दुर्घटना होती हैं तो घायलों को पामगढ़ ,बिलासपुर, जांजगीर हॉस्पिटल में रिफर कर दिया जाता हैं।नगर के हॉस्पिटल से इन जगहों की दूरी 20 से 60 किलोमीटर हैं।गम्भीर रूप से घायल मरीजो को इतनी दूरी तय करने के दौरान बहुतो की जान पर बन आती हैं।समय पर इलाज नही मिलने से दुर्घटना में घायल व्यक्ति काल के गाल में समा जाते है।

नगर में मुख्यमंत्री से लेकर विभिन्न विभागों के मंत्रियों का आनाजाना लगा रहता हैं।हर बार नगर केजनप्रतिनिधि,समाजसेवी, युवा वर्ग,जिम्मेदार नागरिकों द्वारा नगर में आये मुख्यमंत्री,मंत्रीगण तक नगर में व्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से अवगत कराया जाता हैं।लेकिन नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने का आश्वासन देकर जिम्मेदार मंत्री अधिकारी चलते बनते है।इन जिम्मेदार लोगों के जाने के बाद नगर की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए दिया गया आवेदन रद्दी को टोकरी में चला जाता हैं।हर बार नगर के लोग इसी आस में सरकार के नुमाइंदों को अपना मांग पत्र सौपते हैं की नगर में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी हो जाये लेकिन हर बार लोगो को निराशा ही हाथ लगती हैं।बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण लोगो को अन्यत्र इलाज कराने मजबूर होना पड़ता हैं।सरकारी हॉस्पिटल में न तो ठीक से इलाज मिल पाता हैं और न ही दवाई की व्यवस्था रहती हैं।सरकारी हॉस्पिटल में असुविधा को देखते हुए लोग निजी डॉक्टरों से इलाज कराने विवश हैं।निजी डॉक्टर भी इलाज कराने आये लोगो की मजबूरियों का जम कर फायदा उठाते हैं।सरकारी हॉस्पिटल में सुविधाएं नही होने के कारण गरीब तबके के लोग निजी डॉक्टरों के क्लीनिक में लूटने मजबूर है।नगर में ब्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे बड़ा कारण जिम्मेदार विभाग का ध्यान नही देना है।हर बार आश्वासन देकर नेता मंत्री चलते बनते है।नगर के सिविल डिस्पेंसरी में आजतक स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ोतरी के लिए कुछ भी नही किया गया।नगर व आसपास के लोग शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से रोजाना अपने किसी न किसी को खोने को मजबूर है।लोग इलाज के अभाव में अपने परिजनों को खो रहे है और प्रशासनिक अमला मुख दर्शक बने हुए है।
 

सिविल डिस्पेंसरी हॉस्पिटल में नही है पर्याप्त स्टॉप।


नगर में स्वास्थ्य सुविधाओं की पूर्ति के लिए जिस सिविल डिस्पेंसरी हॉस्पिटल संचालन नगर में हो रहा है उस हॉस्पिटल में स्टॉप की कमी है।एक डॉक्टर और कुछ नर्स नगर के लोगो को जैसे तैसे स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहे है।नगर के हॉस्पिटल में न तो एम्बुलेंस है और न ही स्टॉप, लेबर रूम, बॉउंड्रीवाल का निर्माण नही होने से हॉस्पिटल की भूमि पर लोगो ने अतिक्रमण भी कर लिया है।हर बार शासन प्रशासन से इस ओर ध्यान देने की बात की जाती है लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

यदि शिवरीनारायण थाना अंतर्गत आने वाले शहर हो या गांव में किसी की दुर्घटना,फाँसी,जहर खुरानी,करंट से मौत, या अन्य कारणों से मौत हो जाने पर शव का पोस्टमार्टम करने का नियम होता है।नगर में पोस्टमार्टम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी की नियुक्ति नही होने से पोस्टमार्टम का काम नगर के एक ठेकेदार से कराया जाता है।ठेकेदार द्वारा शव का विच्छेदन करने के एवज में 3 हजार से पांच हजार की राशि की मांग मृतक के परिजनों से की जाती है।मृतक के परिजन किसी न किसी तरह ठेकेदार द्वारा मांगी गई राशि की व्यवस्था करते है।क्योंकि वह जानते है कि राशि की व्यवस्था नही कर पाए तो पोस्टमार्टम नही हो पाएगा और शव पड़ा रहेगा।पोस्टमार्टम कराने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करने को लोग मजबूर होते रहते है।यदि मृतक के परिवार वाले राशि की व्यवस्था नही कर पाते तो उन्हें पोस्टमार्टम करने वाले द्वारा पैसे के लिए दबाव बनाया जाता है।यह घटना रोजना देखने को मिल ही जाती है। शव पोस्टमार्टम के लिए गरीब परिवार आखिर कब तक लूटते रहेंगे अधिकारी भी नही बता पा रहे है।

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