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पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (वाराणसी) ::- राजीव मोहन शर्मा ने वाराणसी में प्रवासी भारतीयों को काशी विश्वनाथ के महत्त्व के बारे में बताया। ???? 6 भाषाओं के हैं जानकार।।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (वाराणसी) ::- राजीव मोहन शर्मा ने वाराणसी में प्रवासी भारतीयों को काशी विश्वनाथ के महत्त्व के बारे में बताया। ???? 6 भाषाओं के हैं जानकार।।

देश एवं विदेशों में धर्म की राजधानी माने जाने वाली काशी में भारत देश ही नहीं अपितु विश्व के सभी देशों और विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग बाबा विश्वनाथ की नगरी जो एक त्रिशूल पर बसा है उसे देखने, जानने और समझने पहुंचते हैं। साथ ही वे वेद, पुराण की भी चर्चा धर्माचार्यों से करते हैं। देखने मे यह भी आया कि भारत की प्राचीन संस्कृति, कला, सभ्यता को करीब से देखकर अन्य देशों के लोग काशी में बस जाते हैं। भारत के अनेक प्रान्तों और विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग भी काशी में बस जाते हैं जिससे कि अंतिम समय उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो। काशी के रहने वाले पं राजीव मोहन शर्मा जिन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर किये हैं वे प्रत्येक वर्ष काशी में प्रवासी भारतीयों का सम्मेलन कर काशी स्थित बाबा विश्वनाथ की महिमा, काशी की गलियां तथा बाबा विश्वनाथ परिसर के आस पास स्थित पुराणों में वर्णित मंन्दिरों तथा प्राचीन मंदिरों के बारे में हिंदी, बांग्ला, तमिल, तेलगु, भोजपुरी, राजस्थानी एवं अंग्रेजी भाषाओं में उन्हें इस नगरी के साथ साथ बाबा विश्वनाथ के महत्त्व, उनके पूजन आदि के बारे में बताते हैं । पं राजीव मोहन शर्मा विगत 27 वर्षों से भारतीय संस्कृति, सभ्यता आदि के बारे में विदेशों से आये प्रवासी भारतीयों को इसकी जानकारी देते आ रहे हैं। ऐसा बहुत ही कम दिखाई देता है कि कोई अपने देश की संस्कृति, सभ्यता, धर्म आदि को विदेशों तक इन प्रवासी भारतीयों के माध्यम से भेज रहे हैं। ऐसा देखने और सुनने भी मिलता है कि भारतीय संस्कृति, धर्म, सभ्यता आदि की ओर आकृष्ट होकर विदेश के लोग भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं, पूजन विधि सीखकर देवी देवताओं का पूजन कर रहे हैं, वेद-पुराण में लिखे श्लोकों को समझने का प्रयास कर रहे हैं और अपने जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं। पं राजीव मोहन शर्मा उन प्रवासी भारतीयों को प्राचीन भारतीय ज्योतिष विद्या के बारे में भी बताते हैं साथ ही कुंडली के माध्यम से सठीक गणना कैसे होती है, उसके पीछे लॉजिक क्या है, साइंटिफिक कैसे है इन सबके बारे में भी पं राजीव मोहन शर्माबताते हैं और उनका ज्ञानवर्धन करते हैं।

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