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पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- कब तक मंदिर यूं ही टूटते रहेंगे ??? एक अकेला दंडी सन्यासी, मंन्दिरों कि रक्षा हेतु लड़ रहे हैं , लेकिन कब तक ......

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- कब तक मंदिर यूं ही टूटते रहेंगे ??? एक अकेला दंडी सन्यासी, मंन्दिरों कि रक्षा हेतु लड़ रहे हैं , लेकिन कब तक ......

भारत के माननीय संवेदनशील और विकाशशील पीएम नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठाये हैं उत्तरप्रदेश के शासन एवं प्रशासन ने। विकास क्या - विश्वनाथ कॉरिडोर / गंगा पाथवे निर्माण करने का। बहुत ही उत्तम निर्णय जिससे लोगों की परेशानी न हो और श्रद्धालुगण सीधे गंगा स्नान पश्चात बाबा विश्वनाथ का दर्शन, पूजन कर सके। क्या इस विकास और सुविधा हेतु विश्व की धर्म राजधानी माने जाने वाली काशी जो शिवजी के त्रिशूल पर बसा है , जहां बाबा विश्वनाथ का मंदिर है उसके चारों ओर स्थित पुराणों में वर्णित मंदिर, प्राचीन मंदिर, देव विग्रहों को तोड़ना जरूरी था ? क्या करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था के केंद्र, विश्वास के केंद्र पर कुठाराघात करना जरूरी था ? क्या दूसरे तरीके से पीएम मोदीजी के सपनों को पूरा नहीं किया जा सकता था ? क्यों पक्कामहाल उजड़ गया ? क्यों बाबा विश्वनाथ परिसर के लोगों को अपना मकान, दुकान बेचना पड़ा ? क्या लोगों ने स्वतः ही अपने मकान-दुकान को प्रशासन के हाथों में सौंप दिए ? क्या उनके ऊपर प्रशासन ने किसी तरह का दवाब नहीं बनाकर उनके मकान-दुकान को अपने कब्जे में लिए हैं और उसे तोड़ रहे हैं ? इसे स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल है कि प्रशासन / बिचौलियों ने कोई दवाब नहीं बनाए होंगे। काशी के मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को बचाने एक अकेला दंडी सन्यासी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती केवल सामने आए हैं साथ मे कुछ आस्थावान प्रतिष्ठित लोग, श्रद्धालु उनके साथ खड़े हुए। लेकिन काशी शहर की लाखों सनातन धर्मी जनता, इन मंन्दिरों मे माथा टेकने वाली जनता, मन्नते मांगने वाली जनता, पूजार्चना करने वाली जनता कहाँ चले गए यह बहुत ही आश्चर्य की बात है। जिस काशी में आकर लोग धन्य महसूस करते हैं, जहां लोग मोक्ष की कामना करते हैं वहां इस तरह की घटना घटित हुई यह सभी सनातन धर्मियों के समझ से परे है। तकलीफ तब और हुई जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ने सही मायने में अपनी भूमिका अदा नहीं किये। क्या यह समझ लिया जाए कि वे देखकर भी अंधे बने हुए थे और वस्तु स्थिति को जन मानस के सामने नहीं लाए। इतना विरोध हुआ लेकिन इन्हें मेन स्ट्रीम मीडिया ने उचित स्थान नहीं दिया। यदि दिया होता तो आज काशी में मंदिर, प्राण प्रतिष्ठित देव विग्रह टूटने से बच जाते और असमय देवताओं को मृत्यु वरण नहीं करना होता। प्राण प्रतिष्टित मूर्तियों को तोड़ना किसी की हत्या कर देने के समान हैं और इस हेतु कानून के जानकारों को, संविधान के जानकारों को आगे आना चाहिए था और सरकार व प्रशासन को समझाना था। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती, ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानन्द महाराज, साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, बाबा विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, सुनील शुक्ल, संजय पांडे, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, सतीश अग्रहरि आदि सन्त, विद्ववत जन ही केवल काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु लड़ाई शुरू किए जिस हेतु दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज के नेतृत्त्व में काशी की जनता को जागृत करने हेतु पंचक्रोशी की यात्रा किये, स्वामिश्री: ने पराक व्रत रखा, वाराणसी जिले के प्रत्येक गांवों में जाकर लोगों को इस घोर अनिष्ठ कार्य के बारे में बताया, सर्व देव कोपाहर महायज्ञ किये तथा विभिन्न समय अपनी आवाज बुलंद किये। इतने सब के बावजूद प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगी और प्रशासन खुद पाप कार्य के भागीदार बने। कहावत है जो जैसा करता है उसे इस जीवन मे ही उस किये गए कार्य का फल भोगकर जाना पड़ता है । यह कहावत सच न हो इस हेतु स्वामिश्री: ने यज्ञ कर सभी लोगों की तरफ से परब्रह्म परमात्मा से माफी भी मांगे। बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने बाबा विश्वनाथ को ही वीवीआइपी बना दिया है और वीआईपी दर्शन हेतु 300/- रुपये का टिकट बेचने लगे हैं और ऑनलाइन भी टिकट बिकने लगा है। जो व्यक्ति 300/- रुपये का टिकट लेगा वह चंद मिनटों में दर्शन, पूजन कर आ जायेगा । क्या अपने ही भगवान के दर्शन हेतु अब श्रद्धालुओं को पैसे देने होंगे ? जो व्यक्ति पैसा न दे उनके दर्शन क्या नहीं होंगे ? उनके भी दर्शन होंगे जिस हेतु उन्हें आम श्रद्धालु की तरह पंक्ति में खड़े होकर घण्टों बाद दर्शन करने मिलेंगे। क्या ऐसी व्यवस्था कर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को वीआईपी और आम में नहीं बांट दिया ? इस पर कोई व्यक्ति हिम्मत कर नहीं पूछ पा रहा है कि ऐसा व्यवस्था क्यों और किसलिए बनाया गया। काशी को यदि काशी बनाये रखना है तो काशीवासियों के साथ साथ भारत के समस्त सन्त, महात्मा, सनातन धर्मियों को स्वामिश्री: के साथ खड़ा होना पड़ेगा, मंदिरों व देव विग्रहों को तोड़ने से रोकना होगा तभी पाप मुक्त हो सकते हैं। स्वामिश्री: ने कभी विकास का विरोध नहीं किये हैं। उन्होंने केवल और केवल मंदिर और देव विग्रहों को तोड़ने का विरोध किये हैं। समय बड़ा बलवान है और वह सही वक्त पर सही समय ठीक दिखा देगा। हर हर महादेव।

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