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 कांग्रेस की गुट बाजी के चलते हराने-जिताने का खेल जारी

कांग्रेस की गुट बाजी के चलते हराने-जिताने का खेल जारी

कैलाश जयसवाल 
भाटापारा -  विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीतेगी या हारेगी, यह तो चुनाव के परिणाम बताएंगे, मगर पार्टी के भीतर चुनाव से पहले ही हराने और जिताने का खेल तेज हो गया है। नेताओं की आपस में लामबंदी जारी है।
टिकट की एक लम्बी कतार है लेकिन किसको मिलेगी टिकट अभी तक कुछ भी तय नहीं हो पाया है ,  लेकिन आला कमान के आदेश पर सतीश अग्रवाल,अमित बंटी शर्मा ,सुनील माहेश्वरी और कसडोल के पूर्वे विधायक राजकमल सिंघानिया भी लाइन में लगे हुए है,जिन्हें परोक्ष रूप से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का साथ हासिल है। 

प्रदेश की बात करे तो राज्य की सियासत में कांग्रेस डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है। लगातार तीन विधानसभा चुनावों में और राज्य की लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस बार चुनाव सिर पर है और कांग्रेस पार्टी की भीतरी लड़ाई जारी है। यही कारण है कि अब तक उम्मीदवारों के नाम तय नहीं हो पाए हैं। 

सूत्रो के अनुसार  बात करे तो पार्टी में जहां एक ओर टिकट बंटवारे पर खेमेबाजी है और अपने अपने आकाओ के आदेश से टिकट के लाइन में लगे हुए है जैसे ही टिकट फाइनल होगा फिर मान मनव्वल का खेल भी जारी हो जाएगा लेकिन कोई किसी से कम नहीं है और यही अंदरूनी कला बाजी टिकट मिलने वाले प्रत्याशी के ऊपर भारी पड़ेगा टिकट मांगने वाले टिकट नहीं मिलने पर साथ देने का वादा भी किये है लेकिन अपने वादे में कितना खरे उतरेंगे , यह तो आने वाला समय ही बताएगा

वही जिले के कमान सँभालने वाले दिनेश यदु का कहना है की उम्मीदवारों के नाम तय होते ही सब अपने वादे के अनुसार कॉग्रेस की सिपाही की तरह काम करंगे और प्रत्याशी को जीता कर लाने की जवाबदारी भी उन्ही की रहेगी  

फिलहाल  `राज्य में सत्ता के पक्ष में माहौल नहीं है, कांग्रेस के लिए संभावनाएं बन रही हैं, मगर कांग्रेस की अंदुरूनी लड़ाई नई बात नहीं है। ठीक वैसा ही हाल है कि, छीका को लपकने से पहले ही उसे फोड़ने की जुगत तेज हो गई है। कांग्रेस में गुटबाजी के चलते उम्मीदवार चयन में सहमति नहीं बनी तो भाजपा के लिए जीत की राह एक बार फिर आसान हो जाएगी। भाजपा भी इसी के इंतजार में है।`

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