विशेष

जन्मदिवस विशेष ::- पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं स्वामी जी ।।

जन्मदिवस विशेष ::- पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं स्वामी जी ।।

।।स्वामी  सदानंद सरस्वती जी महाराज के वर्धापन पर विशेष।। रविकांत तिवारी की कलम से ::- धूमा(सिवनी)हमारी भारतीय परंपरा में कहा गया कि आज भी पृथ्वी में कहीं न कहीं कोई न कोई ईश्वरीय अवतार किसी भी रूप में अवतरित होता है जैसे सनातन धर्म की रक्षार्थ भगवान शिव ने आद्य शंकराचार्य जी के रूप में अवतार लेकर पृथ्वी पर सनातन धर्म की रक्षा की । उसी परंपरा का निर्वहन करने म. प्र. के सिवनी जिले में पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवम द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज का अवतार हुआ । ठीक उसी परंपरा में अपनी उपस्थिति प्रस्तुत करने एवम पूज्यपाद महाराज श्री द्वारा बताये गए दिशा निर्देशों एवम मार्गदर्शन में कार्य करने हेतु नरसिंहपुर जिले के ग्राम बरगी (करकबेल) में भाद्रपद कृष्णपक्ष द्वितीया सं. २०१४ तदनुसार ३१ अगस्त सन १९५७ ई. को माता सौ. मानकुंवर देवी एवम आयुर्वेद रत्न पं. विद्याधर अवस्थी जी के यहाँ एक बालक का जन्म हुआ माता पिता ने नामकरण किया रमेश कुमार अवस्थी । बालक रमेश की प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही तथा नरसिंहपुर में सम्पन्न हुई, वहीँ संस्कृत की शिक्षा का आरम्भ ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय झोतेश्वर तथा पूज्यपाद महाराज श्री के सान्निध्य में, एवम वाराणसी में संस्कृत विद्या एवम व्याकरण -वेदान्तादि शास्त्रों का अध्ययन किया । आपकी ब्रम्हचर्य दीक्षा प्रयाग महाकुम्भ सन १९७७ ई. के अवसर पर सम्पन्न हुई !नामकरण किया गया ब्रम्हचारी सदानंद आपके दीक्षा गुरु पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवम द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज हुए । वैयक्तिक आध्यात्मिक साधना एवम चिंतन के अतिरिक्त ज्योतिष्पीठ एवम द्वारकाशारदापीठ द्वारा संचालित जनकल्याण की अनेक प्रवृत्तियों में समर्पण भाव से निरंतर सेवा सदानंद जी में स्वाभाविक प्रवृत्ति मानी गयी । आपकी पूज्यपाद महाराज श्री के चरणो में अपार श्रद्धा ही इस बात का प्रतीक है की पूज्यपाद श्री चरणो की कृपा रज से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में वैशाख शुक्लपक्ष पूर्णिमा संवत २०६० तदनुसार १५ अप्रैल २००३ को दण्ड संन्यास की दीक्षा से आपको अलंकृत किया गया और नामकरण किया गया स्वामी सदानंद सरस्वती ! पूज्य सदानंद जी ने अपने इस स्वाभाविक गुण के ही प्रभाव एवम पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशानुसार एवम पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुंदरी की कृपा से पूज्य महाराज श्री के कार्यों को पूर्ण करते आ रहे हैं उदाहरणार्थ परमहंसी गंगा आश्रम का सौंदर्यीकरण,सुचारू एवम व्यवस्थित सञ्चालन,गौशाला का निर्माण संचालन, माता गिरिजा देवी एवम पिता श्री धनपति उपाध्याय समिति का गठन कर निशक्त एवम असहाय निर्धन बालकों की शिक्षा के लिए अंग्रेजी एवम हिंदी माध्यम के विद्यालय का निर्माण एवम सुचारू सञ्चालन जिसमे दूर दराज के  बालकों/बालिकाओं के लिए बस सञ्चालन की व्यवस्था की गयी ! पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रदेश का एकमात्र निःशुल्क नेत्र चिकित्सालय का शुभारम्भ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के मुख्य आतिथ्य में कराकर जिले ही नहीं अपितु समस्त प्रदेश के हर वर्ग को लाभान्वित कर पूज्यपाद महाराज श्री के चरणो के प्रति अपनी अपार अगाध श्रद्धा प्रस्तुत की है !!  स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज अपने नाम के अनुसार ही अत्यंत सरल एवम सहज हैं । आप पराम्बा भगवती की साधना एवम पूज्यपाद महाराज श्री के चरणों की सेवा में निरंतर लगे हुए हैं स्वामी जी के साहित्य कृतित्व में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी नित्याराधना स्त्रोत्राणि,जीवन सन्देश गुजराती में आद्य शंकराचार्य जी जीवन परिचय, दिव्य द्वारका भव्य शारदापीठ,सौंदर्य लहरी,मणिद्वीप सन्देश,क्या हिंदुत्व खतरे में है, श्रीविद्या समाराधना, भागवत प्रवचन(संकलन),गीता प्रवचन(संकलन), भज गोविन्द (व्याख्या), परमार्थ पथ(संकलन), मठाम्नाय महानुशासनम् (गुजराती व्याख्या),गुरुदीक्षा क्रम, शंकराचार्य स्त्रोत्रावली,प्रस्थानत्रयी(हिंदी अनुवाद), गुजराती मासिक पत्रिका नवभारती के स्वत्वाधिकारी,शारदापीठ विद्यासभा की शोध पत्रिका शारदापीठ का प्रकाशन, द्वारकाशारदापीठ आर्ट्स कॉमर्स एवम एजुकेशन कॉलेज की वार्षिक पत्रिका नवभारती का प्रकाशन निरंतर करा रहे हैं । आज स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज का 60 वा जन्मोत्सव है हम स्वामी से प्रेरणा लेकर उन्हें अपना आदर्श मानकर उनकी वंदना करें । संकलन - रविकांत तिवारी धूमा सिवनी 

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