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खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- हिन्दू कोई जीवन पद्धति नहीं है अपितु हिन्दू एक धर्म है ::- स्वामिश्री: ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- हिन्दू कोई जीवन पद्धति नहीं है अपितु हिन्दू एक धर्म है ::- स्वामिश्री: ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि क्रांतिकारी सन्यासी दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने अपने चिरपरिचित अंदाज में ऐसा निशाना साधा की समूचा सभागृह जय कारे से गूंज उठा। स्वामिश्री: ने कहा समाज का निर्माण जैसे चेहरा करता है ठीक उसी प्रकार ब्राह्मण भी समाज का निर्माण करता है। उन्होंने कहा सदा से यह प्रयास चलता रहा कि सनातन धर्म को नष्ट कर दिया जाए। वर्णाश्रम ही सनातन धर्म है। सनातन धर्म के रक्षा का कार्य ब्राह्मणों का है।  स्वामिश्री: ने कहा कि हमारे देश के संवेदनशील पीएम विश्व का ऐसा कोई देश शायद बचा हो जहां वे नहीं गए होंगे। कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि शायद पीएमओ के अधिकारी मैप लेकर ढूंढ रहे होंगे कि कौन सा देश और बचा है जहां हमारे पीएम नहीं गए होंगे। स्वामिश्री: ने पीएम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे जिस भी देश मे गए हैं वहां वे कहते हैं कि हम बुद्ध और गांधी के देश से आये हैं। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि हम माँ गंगा, माँ यमुना के देश से आये है , उन्होंने कभी नहीं कहा कि हम भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के देश से आये हैं। जब कि उन्होंने भारत मे अपने संसदीय क्षेत्र में कहा कि मुझे माँ गंगा ने बुलाया है। आज घोर अनीति हो रही है। स्वामिश्री: ने कहा कि आप अगर धर्म निरपेक्ष हो तो धर्म स्थानों को क्यों अधिकृत कर रहे हो और अधिकृत करने के लिए क्या केवल हिन्दू धर्म है ? इतना शनते ही समूचा सभा गृह हर हर महादेव के नारे से गूंज उठा और उपस्थित सभी ने करतल ध्वनि से उनके बात का जोरदार समर्थन किया।  स्वामिश्री: ने आगे कहा कि हमारे देश मे एक ऐसी संस्था है जो स्वयं सेवकों की भर्ती करती है। अब इन पूर्ण कालिक स्वयं सेवकों को काम मिले इस हेतु वे हमारे तीर्थ स्थानों, मंन्दिरों को अधिग्रहण कर रहे हैं, देव मंन्दिरों को तोड़ रहे हैं। वे उन देव मंन्दिरों को भी नहीं छोड़ रहे हैं जिनका वर्णन पुराणों में है। आगे उन्होंने कहा काशी में 8 मंदिर तोड़े जा चुके हैं और जब से हमने मंदिर बचाओ आन्दोलनम शुरू किए हैं उसके बाद 9 वां मंदिर वे तोड़े नहीं हैं लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं किये है कि आगे तोड़ेंगे या नहीं तोड़ेंगे। देश मे नदियों की हत्या हो रही है, साबरमती नदी जैसे मॉडल बनाने की चेष्टा हो रही है फिर भी हम चुप हैं। स्वामिश्री: ने मंच से सभी के उद्देश्य से कहा - आपने लिए भले मत लड़ो लेकिन अपने सनातन धर्म, तीर्थ स्थानों और मंन्दिरों के लिए लड़ो। स्वामिश्री: ने बहुत बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पर्यटन और तीर्थस्थान एक है ? यदि सभी का अधिग्रहण कर गाइड पद्धति ला दोगे तो तीर्थ पुरोहित क्या करेंगे ? कहाँ से वे अपने और अपने परिवार का पेट पालेंगे ?  जो तीर्थ करने आते हैं वे कर्मकांड के लिए ब्राह्मण ढूंढते है और उन ब्राह्मणों के मुख से मंत्र और श्लोक सुनकर वे तृप्त होते हैं और मन को संतुष्ट कर तीर्थ कर घर लौटते हैं । क्या यह कार्य कोई गाइड कर सकता है ? कभी नहीं कर सकता है। हम प्रत्येक को संगठित होकर रहने की आवश्यकता है नहीं तो एक समय आएगा जब ब्राह्मणों के लिए कुछ नहीं बचेगा।

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