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खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- शंकराचार्य ने दिया संदेश -

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- शंकराचार्य ने दिया संदेश - " ब्राह्मण एक हो जाएं और संगठित हो जाएं "।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के मंच से देश के प्रत्येक ब्राह्मणों के उद्देश्य में कहा - "ब्राह्मण एक हो जाएं "। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि ब्राह्मणों को ढकेलते ढकेलते दीवाल तक पहुंचा दिया है। शंकराचार्य महाराज ने जोर आवाज में कहा ब्राह्मण संगठित हो जाएं जिससे एक बुलंद आवाज बनेगी और सत्ता में बैठे लोगों के साथ साथ आम नागरिक भी सुनेगी। उनके इस उद्गार से खचाखच भरे सभागृह में लोगों ने हर हर महादेव के नारे से पूरा वातावरण धर्म और न्याय मय बना दिया। शंकराचार्य महाराज ने आगे कहा की हमारे देश मे समाज का निर्माण धर्म के लिए हुआ था। उस धर्म को पालन करने में राज्य हमारी सहायता करे। भारत की प्राचीन राजनीति उसी के आधार पर चलती थी लेकिन आज का परिदृश्य विपरीत से हो गया है। आज लोग सोचते हैं ब्राह्मण ही क्यों पूजा-पाठ आदि करे, क्यों न ब्राह्मणों की जगह दूसरे को सीखा दिया जाए।  हम जब भी अपने इष्ट देवता की आराधना करते हैं तब हम स्मरण करते हैं - ब्रह्म लोक से लेकर लोकालोक पर्वत तक जहां सृष्टि समाप्त हो जाती है उन सबके बीच जितने भी ब्राह्मण देवता निवास करते हैं उन्हें हम प्रणाम करते हैं। शंकराचार्य महाराज ने कहा कि ब्राह्मणों को समाप्त करने के लिए अंतरजातीय विवाह करवाये जा रहे हैं जिसे सरकार प्रोत्साहित कर रही है। आजकल कुछ व्यापारी लोग तीर्थ स्थानों में बैठ गए हैं और तीर्थ पुरोहितों का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने तीर्थ पुरोहित, पुजारी, ब्राह्मणों को सचेत करते हुए कहा कि आगे संकट और आने वाला है। हमारा भारत देश सनातन धर्म से है और इसे नष्ट करने की साजिश हो रही है। प्रत्येक से पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा - हमे धर्म को आगे रखकर चलना चाहिए और यह कार्य वृंदावन धाम से शुरू हो। हम तो भोजन खिलाकर तब खाने वालों में से हैं इसलिए हमें पूर्ण रूप से संगठित होना पड़ेगा। शंकराचार्य महाराज ने कहा अभी देश मे मंदिर, मूर्तियां तोड़े जा रहे हैं वह इसलिए क्यों कि सरकार अपना आमदानी बढ़ाना चाहती है। यदि हम संगठित नहीं हुए तो आगे धीरे धीरे सब उनके हाथ मे चला जायेगा, ऐसे में हम सनातन धर्म की शिक्षा कैसे देंगे ?  इसका शसक्त विरोध होना चाहिए और यदि विरोध नहीं हुआ तो सरकार अपने खर्चे के लिए भारत के मठ, मंन्दिरों में चढ़ने वाला दान, देवी देवताओं के गहने , बर्तन इत्यादि उनके कब्जे में चले जायेंगे। आप देख ही रहे हो सरकार अपने खर्चे के लिए गोमांस का निर्यात कर रही है जो घोर पाप है साथ ही कुछ राज्यों में सरकार शराब भी बेच रही है। अब उनकी निगाहें सनातन धर्म के मठ, मंन्दिरों पर है। हमारा हिन्दू धर्म  ब्राह्मण धर्म है। इस महासभा में पूज्य शंकराचार्य महाराज के शिष्य प्रतिनिधि क्रांतिकारी दंडी सन्यासी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ने भी अपने ओजस्वी रूप में सभा को संबोधित किया साथ ही अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष व अन्य संत, महात्मा एवं तीर्थ पुरोहित महासभा के सदस्यों ने भी संबोधित किया और पूज्य महाराजश्री का स्वागत के साथ साथ वंदन और अभिनंदन किया।

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