विशेष

"दुसरा जन्म” वर्षा गल्पांडे की कलम से.......

“दर्द से कर्राती है एक औरत
 अपनी नाल से बंधे एक शुशु को
जन्म देकर एक औरत से बन जाती है माँ
शिशु के जन्म के साथ ही जन्म लेता है एक
नया रिश्ता और एक पुरुष बन जाता है एक पिता”
 

आज हम बाजार में बहुत सारी शौपिंग में व्यस्त थे हाथों में बहुत से खिलौने और कुछ टॉय के कैरी बैग हमने हाथों में पकड़ रखे थे एक दूकान से निकलते ही माँ ने कहाँ अरे हमने अभी तो कुछ सोने की चीजें ली ही नहीं मैंने माँ से कहाँ इतना सब तो ले लिया अब सोने का क्या लोगी मैं बहुत थक चुकी हूँ हो गया अब घर चलों ना मेरी बात सुनकर माँ थोड़ी नाराज होकर बोली थक मैं भी गई हूँ मगर कुछ रस्में होती है जो लड़की वालों के मायके वालों को पूरी करनी होती है माँ की बाते सुनकर मैं चलते हुए रुक गई और माँ से बोली एसी कौन सी रस्म बच गई है जो हमनें पूरी नहीं की है वैसे भी दीदी तो ससुराल में खुश है और जीजू तो इतने सीधे है कभी कुछ कहते ही नहीं और आज तक दीदी के ससुराल वालों ने कोई भी शिकायत नहीं की और वैसे मुझे याद है माँ हमनें शायद ही कोई रस्म हो जिसे हमनें पूरी न की हो| माँ ने कहाँ हाँ हमनें सारी रस्में पूरी की थी मैंने कहाँ तो फिर किस लिए सोना लेना है मैंने माँ से पूछा ?

माँ ने कहाँ ये तुम्हारी दीदी का पहला बच्चा है और उस बच्चे का ये पहला जन्म दिन है और ऊपर से लड़का है ।अक्सर हमारा समाज जब भी ऐसे कुछ कार्यक्रम होतो उनकी नज़रे मायके के घरवालों पर ज्यादा होती है की उन लोगों ने क्या दिया है उनकी उम्मीद होती है की वो अपने नाती के जन्म दिन पर कुछ सोने की वस्तु भेट करें ऐसा नहीं है की मायके से ही अपेक्षा की जाती है ये अपेक्षा ससुराल वालों से भी की जाती है की दादा-दादी ने अपने पोते को क्या दिए है भेट में |माँ की बातें मुझे अच्छी नहीं लगी भला दादा-दादी और नाना-नानी के आशीर्वाद के सामने इन अपेक्षाओं का क्या ज़्यादा महत्व है?जब ससराल के लोग अपनी बहुओं को प्रताड़ित करते है तो हम उन्हें ही बुरा भला कहते है असल में हम ही उसके जिम्मेदार होते है ऐसी रिवाजों को पूरा करके फिर भला हमें बुरा भी नहीं लगना चाहिए अपनी लड़कियों को तकलीफ में देखकर।माँ ने आवाज़ लगाई कहाँ खो गई माँ ने अपनी बात आगे जारी रखते हुए कहाँ इसलिए अब हम किसी ज्वेलरी शॉप चलते है और वहां से कुछ ले लेते है गर्मी बहुत है वो देख सामने एक जूस की दूकान है वहां से मैं नीबू शरबत पी लुंगी और तुम नारियल पानी पी लेना माँ ने कहाँ और हम जूस दूकान की तरफ चल पड़े|

हम ज्वेलरी शॉप पहुचें तो शॉप की दूकान में खड़ी लड़की ने एक अच्छी सी मुस्कान के साथ हमारा स्वागत किया और कहाँ आप लोगों को क्या दिखाऊं माँ ने कहाँ आपके पास एक साल के बच्चे के लिए क्या है वो क्या है ना मेरे नाती का पहला जन्म दिन है तो उसे उपहार देना है ऐसा माँ ने उस लड़की से कहां उसने भी झट से कहाँ हमारे पास बहुत सुन्दर पैंडल है और वो एक लाल कपड़ा बिछाकर सोने के पैंडल को एक-एक करके हमें दिखाने लगी उसमें से कुछ पैंडल माँ ने अलग कर दिए जो माँ को पसंद आये थे ऐसे ही उसने और भी बहुत सी चीजें हमें बता चली गई लास्ट में सब देखने के बाद माँ ने एक पैंडल और चांदी की एक गिलास ली और हम वहां से निकल ही रहे थे तो फिर उस लड़की ने प्यारी सी मुस्कान के साथ हमें फिर से आइयेगा आपलोग बोल के हमें विदा किया|आखिर कार सब कुछ खरीदकर हम घर तो पहुच चुके थे पर अभी भी काम ख़त्म नहीं हुए थे सुबह की ट्रेन थी जिससे हमें दीदी के ससुराल यानी बैंगलौर के लिए रवाना होना था और अभी जो हमने इतनी खरीदारियां की थी उसे और खुद के सामान की पैकिंग भी करनी अभी बची थी|
पुरे एक दिन के सफ़र के बाद आखिरकार हम दीदी के ससुराल पहुचें|हमें देखकर दीदी के ख़ुशी का ठिकाना न था हाँ भई हर लड़की को मायके के लोगों से एक अलग की तरह का स्नेह होता है| दीदी ने हमें हमारा रूम दिखाया और कुछ देर आराम करने को कहाँ माँ ने दीदी से कहाँ हाँ पर पहले तुम्हारी सास से मिल लूँ कहकर वो उनसे मिलने चली गई और मैं तो अपने शहजादे को गोदी पे लिए उससे खूब प्यार और दुलार करने में व्यस्त हो गई | उसके गालों को स्पर्श मानो नाजुक फुल को छूने जैसा था वो भी हमें देख कर प्यारी सी मुस्कान से हमारा दिल जित रहा था और न जाने अपनी तोतली भाषा में क्या-क्या हमें कह रहां था शायद वो हमें देख ख़ुशी का इज़हार कर रहां हो|शाम हो चुकी थी सब मेहमानों का आना शुरू हो चुका था मेहमानों में नन्हें-नन्हें बच्चे ज्यादा दिख रहें थे और उनके शोर से पूरा हौल गूंज रहा था और उन बच्चों के माता-पिता उनकी बदमाशी को देख परेशान होकर उन्हें शांत रहने की सलाह दे रहे थे दीदी भी हौल में पहुच चुकी थी |

दीदी-जीजू और उनका शहजादा तीनों ने पिक कलर के मैचिंग कपडे पहन रखे थे जिसमें वे लोग काफी अच्छे लग रहे थे कुछ देर बाद केक कटिंग किया गया माँ ने मुझे आवाज लगाईं की चलों हम भी भी गिफ्ट दे देते है मैं और माँ दीदी के पास जाकर वो सारी चीजें उसे दी जो हमनें शहजादे के लिए खरीदी थी |इतना सब देख कर जीजू ने माँ से कहाँ मम्मी इसकी क्या जरूरत थी आप आ गई आपने आशीर्वाद दे दिया इतना ही काफी है इसकी जरूरत नहीं थी अगली बार से ये सब लाने की जरूरत नहीं घर वालों का प्यार ही सबसे बड़ा उपहार होता है उनके बच्चों के लिए उनकी बातें सुनकर माँ ने भी उनके सर पर आशीर्वाद का हाथ फेरा|
मैं सब कुछ खड़ी देख रही थी पर मन मेरा उदास हो रहा था कुछ था जिसकी कमी मुझे खल रही थी हौल की साजसजा बहुत ही सुन्दर थी खाना भी काफी अच्छा बना था सब बिलकुल परफैक्ट था पर फिर भी कुछ कमी लग रही थी एक प्रशन था जो मुझे काफी देर से परेशान कर रहा था वो ये की हमनें सब कुछ उस बच्चे के पहले जन्म दिन की ख़ुशी के उपलक्ष में किया और काफी खुश थे सब लोग यहाँ तक की हमनें भी उस बच्चे के लिए न जाने क्या कुछ नहीं खरीदा पर हम एक बात भूल गये की एक बच्चे के जन्म के साथ एक माँ का भी दुसरा जन्म होता है |वो नौ महीने बच्चे को अपने पेट में रखती और एक असहनीय दर्द सहकर उसे जन्म देती है हम उस माँ को क्यूँ भूल जाते है वो भी तो उस दिन माँ बनती है,उसका भी उस दिन नया जन्म होता है तो हमें उसे भी तो बधाइयां देनी चाहिए उसके दुसरे जन्म की ख़ुशी में उसके माँ बन्ने की ख़ुशी में उसे भी हर साल उपहार देना चाहिए माँ के साथ-साथ पीता भी उतना ही हकदार इन सब चीजों का हाँ वो बच्चे को जन्म भले ही न दे पर वो भी बच्चे के जन्म के बाद पिता बनता है इसलिए वो भी बधाई का पत्र है पर अक्सर हम इन बातों को भूल जाते है केवल हमें याद रहता है तो केवल बच्चे का जन्म दिन|

मैं दीदी और जीजू के पास गई और उन्हें भी हैप्पी बर्थडे कहाँ सब लोगो मुझे आश्चर्य भरी नज़रों से देखने लगे उन्हें लगा की बच्चे के साथ कही दीदी या जीजू का भी जन्म दिन तो नहीं और वो लोग भूल गये हों ।दीदी और जीजू ने मुझे कहाँ अरे आज भला हम दोनों का जन्म दिन कहाँ है जो तुम हमें बधाइयां दे रही हो मैंने कहाँ एक बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता का भी एक नया जन्म होता है साथ ही एक नया नाम भी उनके साथ जुड़ जाता है और एक नया रिश्ता भी तो हुआ ना इस हिसाब से आप लोगों को भी जन्म दिन तो बधाई देना तो बनता है मेरी ये बातें सुनकर दीदी और जीजू के साथ ही हौल के सारे लोग भावुक हो गये और पूरा हौल तालियों के शोर से गूंजने लगा|

वर्षा गल्पांडे

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