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आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ...जिम्मदारो की लापरवाही से बुझा गरीब घर का चिराग

आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ...जिम्मदारो की लापरवाही से बुझा गरीब घर का चिराग


रायगढ़:- माँ बाप अपने घर के चिराग को बेहतर शिक्षा और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए घर से बाहर भेजते है ताकि उसकी जिंदगी सवर सके जिंदगी में वो बेहतर कर सके …. सभी अपनी अपनी हैसियत के अनुसार अपने घर के लाल को बेहतर शिक्षा की तालीम देने की कोशिश करते हैं चाहे अमीर हो या गरीब … जिनके पास पैसे होते हैं वो बड़े बड़े प्राइवेट स्कूल पब्लिक स्कूल भेजते है …. तो वहीं गरीब तपके के लोग अपने घर के चिराग को शासकीय छात्रावास भेजते है….उन्हें उम्मीद होती है कि उनके घर के चिराग उनका नाम रौशन करें लेकिन उन गरीब माँ बाप को क्या पता कि जहां जिन जिम्मदारो के हवाले अपने घर का चिराग को छोड़ आये हो उनकी लापरवाही से उनके घर का चिराग बुझ जाए……वो चिराग अपने घर वापस न आ पाए….

 

 

ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले कापू थाना क्षेत्र में स्थित शासकीय छात्रावास का है जहां के जिम्मदारो के लापरवाही से एक मासूम की जान चली गयी …इस छात्रावास में एक मासूम गोविंदा कुर्रे जो…..कक्षा 8वी में पढ़ता था …..जहां उसके साथी उसके साथ बेरहमी के साथ मारपीट करते थे लेकिन जिम्मदारो ने कभी इसपर ध्यान नही दिया …नतीजा उसके ही साथी बच्चों ने उसे बेरहमी के साथ मार मार कर अधमरा कर दिया ….जिसे अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी….छात्रावास में क्या क्या हुआ इसकी जानकारी मृतक के छोटे भाई रोविन्द कुर्रे के परिजनों और मीडिया को जानकारी उसने बताया कि छात्रावास में बेवजह के उसके 4 साथी उसके साथ मारपीट किया करते थे जिसकी शिकायत छात्रावास अधीक्षक से की गई मगर कोई संज्ञान नही लिया गया जिसकी वजह से उन बच्चों का हौसला और बुलन्द होते गया अंजाम आज गोविंदा आज हमारे बीच नही रहा …..आज उस गरीब परिवार के घर का चिराग तो बुझ गया मगर सिस्टम पर कई सवाल भी खड़े हो गए …सवाल पहला .. आप अपनी स्क्रीन पर जो तस्वीर देख रहे हैं इसको कहने की जरूरत नहीं कि किस तरीके से बेरहमी से उसके साथ मारपीट की गई लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर साहब का कहना है कि यह नेचुरल डेथ मृतक के शरीर पर कहीं पर भी कोई चोट के निशान नहीं है….. जिसे अंधा भी कह देगा कि गोविंदा के साथ क्रूरता के साथ मारपीट की गई लेकिन डॉक्टर साहब का कहना है कि यह नेचुरल डेथ है….. तो वही दूसरा छात्रावास में छात्रावास अधीक्षक साहब का न रहना यहां तो साहब की जब मर्जी होती है तब साहब आते हैं और जब मर्जी नहीं होती तो नहीं आते जिस दिन गोविंदा के साथ बेहरहमी के साथ मारपीट की गई उस अधीक्षक साहब रहते तो ये न होता आज उस गरीब के घर का चिराग न बुझता…. सवाल तीसरा जब सभी छात्रावास में सेक्युरिटी अनिवार्यता है तो यहां क्यो नही…मामले की लीपापोती करने वाले के ऊपर कार्यवाही होगा या नही …. सवाल तो कई खड़े हो रहे है… लेकिन क्या उस गरीब घर के चिराग को फिर से वापस लाया जा सकता है क्या सिस्टम में सुधार हो पायेगा ….या फिर नियम कानून कार्यवाही सिर्फ बड़े लोगो के लिए है और गरीबों के लिए सिर्फ बेबसी ही लिखी है….आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ…..

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